आगरा (Agra), प्रथम विश्व
युद्ध (First World War) के सौ साल हो जाने की स्मृति में एक तीन दिवीय अभिलेख
प्रदर्शनी का आयोजन अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में होगा।पूर्व में इसके लिये 16सितम्बर की तारीख निर्धारित थी ।इसका आयोजन स्थल पूर्ववत अगरा कॉलेज ही रहेगा । क्षेत्रीय अभिलेखागार आगरा के अधिकारी रमेश चन्द्र ने बताया कि पहले
विश्व युद्ध से संबधित रिकार्ड की कई महत्वपूर्ण फाइलें आगरा आर्काइव आफिस
में उपलब्ध है,इन्हीं में से प्रदर्शित किये जाने वाले प्रदर्शों का चयन किया
गया है।अब कुछ समय और मिलजाने से कई महत्वपूर्ण प्रदर्श और उपलब्ध हो सकेंगे।
अब पहले विश्वयुद्ध का अब
कोई योद्धा अब नहीं बचा है, नहीं इसको लेकर लोगों में खास दिलचस्पी ही है।ज्यादतर
को तो यह भी नहीं मालूम कि यह शुरू क्यो हुआ था और भारतीय सैनिकों ने रायल इडियन
अर्मी के सदस्य के रूप में यूरोप के अलावा सेट्रल एशिया के वैस्टर्न फ्रंट व मध्यपूर्व
में सेनाई के रेगिस्तान से लगे क्षेत्रों में भी मोर्चों पर रणकोशल और दक्षता का
प्रदर्शन किया था। आगरा में स्थित सैन्य टुकडियों के द्वारा सबसे पहले आपनी
मौजूदगी यूरोप में फ्रांस और बेल्जयम में जर्मनियों के साथ चल रही खूनी जंग के मोर्चों पर दर्ज करवायी गयी थी।
प्रदर्शित होने जा रहे साक्ष्यों के अलावा इन से सम्बन्धित फाइलें आधुनिक इतिहास और भारत की प्रशासनिक व्यवस्था का अध्ययन करने वालों के लिये खास दिलचस्पी वाले दस्तावेजों से भरी हुई हैं।प्रदेश आर्काइब का भी इस आयोजन में योगदान है।कई महत्वपूर्ण अभिलेख लखनऊ से भी आने की संभावना है।पहले विश्वयुद्ध को लेकर आगरा ही नहीं प्रदेश का पहला आयोजन है।उल्लेखनीय है कि इस युद्ध में भारत के 65 हजार जवान शाहीद हुए थे।
