पत्रकारों का भविष्य दस दिसम्बर को होगा तय
बोर्ड की संस्तुतियां जुलाई 2010 से लगू करने का
सरकार द्वारा र्निदेश दिया हुआ है
नई दिल्ली :पत्रकारों एवं गैर पत्रकारों
के पुनरीक्षित वेतन मान निर्धारण को गठित ‘मजीठिया बेजबोर्ड’ की सिफारिशें लागू हो पाने के सम्बन्ध में सुप्रीम
कोर्ट में 10 दिसम्बर को अंतिम सुनवायी हो जाने के बाद ही स्थित स्पष्ट हो सकेगी।
देश के कई प्रमुख प्रकाशन समूहों के द्वारा बोर्ड की सिफारिशें अपने प्रतिष्ठानों
में लागू करना तो दूर उसके गठन के औचित्य को ही चुनौती दे रखी है। पिछले कई साल
से चल रही सुनवाई के क्रम में 27 नवम्बर को नवीनतम सुनवाई हुई थी।जिसमें कर्मचारी
यूनियनों के वकील बी के पाल और परमानन्द पांडे ने सुनवाई करने वाली पीठ के समक्ष
कहा था कि बेज बोर्ड की संस्तुतियां पहले ही संघ सरकार स्वीकार कर लागू करवाने
को निर्देश जारी कर चुकी है।समाचार प्रबंधन की ओर से पूर्व में ही कई प्रमुख वकीलों के माध्यम से कोर्ट में अपना पक्ष रखा जा चुका है।उल्लेखनीय हे कि समाचार पत्रों के पत्रकार और गैर पत्रकार कर्मचारियों के लिये बोर्ड की संस्तुतियां जुलाई 2010 से लगू करने का सरकार द्वारा र्निदेश दिया हुआ है । कई राज्यों के श्रम विभाग के द्वारा इसके लिये कमेटियां तक गठित की हुई हैं। उत्तर प्रदेश में भी इसके लिये कोशिश की गयी थी किन्तु शासन के द्वारा अपने स्तर से ही गठित कमेटी को भी अब तक प्रभावी नहीं बनाया जा सका है।
इधर उत्तर प्रदेश श्रम विभाग के विभिन्न न्यायालयों में पत्रकारों और गैर पत्रकारों के मामले बडी संख्या में लम्बित हैं।कुछ वाद निस्तारित भी हुए हैं किन्तु श्रम विभाग के न्यायालयों के द्वारा दिये गये आदेशों के क्रियान्वयन में सरकारी एजेंसियों का रुख सकारात्मक नहीं है।फलस्वरूप कर्मचारियों को उनके पक्ष में निर्णय हो जाने के बावजूद कोई बडी राहत नही मिलपाती है। मजीठिया कमीशन के वेतन मानों के अनुसार अब तक एक भी वाद में मुआबजा मिलपाना संभव नहीं हुआ है, जबकि बोर्ड के गठन को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई कर रही पीठ स्वयं यह स्पष्ट कर चुकी है कि बेजबोर्ड की सिफारिशों के लागू करने पर कोई स्टे नहीं है।
