एक पैसे का मेहनताना न लेने वाले प्रेम का नाम आंकित है मूलप्रति के हर पृष्ट पर
| ( प्रेम नारायन रायजादा सक्सेना) |
आगरा: भारत के संविधान को बाबा साहिब डा भीम राव अम्बेडकर की अध्यक्षता में गठित कमैटी ने जितनी मेहनत से बनाया था और इस राष्ट्रीय महत्व के दस्ताबेज को संजो कर विशिष्ठ साक्ष्य को हस्तलिखित प्रति रूप में संजोने का कार्य किया था अपने समय के श्रेष्ठ कैलीस्क्रिप्ट राईटर प्रेम बिहरी ने। संविधान और उसके बनाने में योगदान देने वालो की समितियों को जानने वालों में से भी संभवत: कम ही होंगे जो कि संविधान को कैलीग्राफी में संजोने वाली इस शख्सियत को जानते हों।
दरअसल संविधान की हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा मूल प्रतियां टाइप न होकर कैलीग्राफी में लिखी हुई हैं। कैलीग्राफिस्ट प्रेम नारायन रायजादा सक्सेना रायजादा जो कि हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं के ही नहीं अपितु फार्सी उर्दू की भी समझ रखते थे ने ही सविधान के ड्राफ्ट को पहली आधिकारिक प्रति के रूप में हस्तलिखित करने का काम किया था।
छै महीने में ही लिपबद्ध कर डाला था संविधान
अपने समय के सबसे सिद्धहस्त सुलेख लेखक प्रेम नारायन रायजादा (सक्सेना) ने संविधान को लिपिबद्ध करने का काम 26नवम्बर 1949 को पूरा कर दिया था। इस काम को पूरा करने में उन्हें लगभग छै महीने का समय लगा। एक शब्द तो क्या कौमा और फलस्टाप तक में फर्क नहीं होना चाहिये इस बात का खासतौर से ध्यान रखा गया। कयोकि
जिन हस्त निर्मित पेपर शीटों का इस्तेमाल किया जा रहा था,उनके वार्डर और 22 भागों में प्रत्येक के आरंभिक पृष्टों पर प्रख्यात चित्रकार नन्दलाल बोस के द्वारा चित्रित थे। हर पेपर शीट के वार्डर पर आंकित चित्रों के संयोजन का अपना अलग ही महत्व था। इस लिये जानते थे कि छोटी सी भी त्रुटी से काम कितना बढ जायेगा।
संविधान के पृष्टों की सजावट
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| संविधान के हर पृष्ट पर आंकित है प्रेम नारायन जी के हस्ताक्षर 'प्रेम ' (इन्सेट) |
हालांकि न तो संविधान सभा के किसी सदस्य ने ही इसका उल्लेख किया है और नहीं किसी अन्य ने किन्तु जिसने भी मुगल दरबार की पुस्तक बादशाह नामा की कृति देखी है और संविधान को भी वह अनायास ही पृष्टों की सजावट की देखा है तो अनायास ही पृष्टों की सजावट और हस्तलिपि को दृष्टिगत दोनों की आपस में तुलना करने लगता है। हालांकि विषय वस्तु और महत्ता की दृष्टि से 'बादशाह नामा ' मुगल बादशाह शाहजहां के दरबार के बृतांतों पर आधारित है जबकि भारतीय संविधान एक महान लोकतंत्र के नागरिकों का आत्म समर्पित दस्ताबेज है।
यूपी के ही रहने वाले थे सक्सेना जी
संविधान को हस्तलिपि से सजाने वाले कलमकार प्रेम बिहारी का जन्म 17 दिसम्बर 1901 को कैलीग्राफी कला के लिये विख्यात परिवार में हुआ था। उनके बाबा मास्टर राम प्रसाद सक्सेना और चाचा महाशय चतुर बिहारी नारायण सक्सेना अपनी विधा के लिये विख्यात थे।
प्रेम बिहारी जी उ प्र (ततकालीन संयुक्त प्रांत) के रहने वाले थे किन्तु किस जगह के अब तक इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं है। उन्हें कैलीग्राफी की शिक्षा अपने बाबा मास्टर राम प्रसाद सक्सेना से मिली थी जो कि अंग्रेज प्रशासनिक अधिकारियों को फारसी भाषा की शिक्षा दिया करते थे। बाबा से कैलीग्राफी सीखने के दौर में ही वह उनके साथ ही दिल्ली चले गये जहां उन्होंने सैंट इस्टीफेंस कॉलेज से ग्रजुएशन किया। इसके बाद वह एक ऐसे कैलीग्राफिक हो गये जो कि अपनी कला मे माहिर होने के साथ ही हिन्दी, अंग्रेजी और फारसी भाषाओं की जानकारी में भी सिद्ध हस्त था।
हर पृष्ट पर नाम आंकित करने देने का किया आग्रह
जब संविधान का ड्राफट फयनल होकर छपने लिये तैयार था तब प्रेम बिहारी जी से इसे कैलीग्राफी में लिपि बद्ध करने के बारे में कहा गया। यही नहीं इसके एवज में भुगतान की राशि के बारे में भी पूछा गया । इस पर प्रेम बिहरीजी ने केवल यही कहा कि वह अपने जीवन की उपलद्धताओं से संतुष्ट हैं।भगवान की कृपा से वह सब उनके पास है जिसकी उन्हे जरूरत है। उन्हे एक धेला (सिगिल पेनी) भी नहीं चाहिये।किन्तु अगर संभव हो जाये तो संविधान के हरपेज पर वह अपना नाम तथा अंतिम पृष्ट पर अपने नाम के साथ अपने बाबा का नाम भी आंकित करना चाहेंगे। जिनसे उन्हें यह कला विरासत के रूप में पायी ।स्वयं नेहरू जी ने उनकी बात को सुनकर ततकाल कुछ भी नहीं कहा किन्तु बाद में संविधान सभा के सदस्यों की सहमति से संविधान को कैलीग्राफी में लिपिबद्ध करवाने का काम प्रेम बिहारी जी को सौंप दिया गया।
कांस्टीट्यूशनल हाल में मिला वर्कशाप के लिये कमरा
स्टूडियो और कार्यालय के रूप में उन्हें कांस्टीट्यूशन हॉल के एक कमरे को आवंटित कर दिया गया। संविधान में उस समय 8 भाग( schedules) व 395 अनुक्षेद(articles) लिखे गये थे। इन सभी को उन्होंने छै महीने के समय में लिपिबद्ध कर दिया।
इस कार्य में उनके द्वारा 303निब और 254 दबात स्याही का इस्तेमाल किया गया।
हीलियम गैस से भरे बाक्स में रखी गई है मूल प्रति
भारतीय संविधान के हर पेज को चित्रों से आचार्य नंदलाल बोस ने सजाया है। इसके अलावा इसके प्रस्तावना पेज को सजाने का काम राममनोहर सिन्हा ने किया है। वह नंदलाल बोस के ही शिष्य थे। संविधान की मूल प्रति भारतीय संसद की लाइब्रेरी में हीलियम से भरे केस में रखी गई है।संविधान की हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषामें लिखी इन प्रतियों को पूर्व राष्ट्रपति स्व राजेन्द्र प्रसाद जी के अलावा आधिकारिक रूप से किसी अधिकार संपन् न अगर किसी अन्य ने निकलवा के देखने समय निकाला तो वह थे पूर्व राष्ट्रपति स्व स्व ए पी जे कलाम । उनके निरीक्षण का एक इंस्पैकशन नोट भी संसद के रिकार्ड में है।
