4 अप्रैल 2017

भारत और ब्रिटेन मुक्‍त बाज़ारों और मुक्‍त व्‍यापार के पक्षधर

भारत और ब्रिटेन इस बात से सहमत हैं कि वैश्विकरण का विश्‍व पर सकारात्‍मक प्रभाव पड़ा है, और दोनों देश मुक्‍त बाज़ारों और मुक्‍त व्‍यापार के पक्षधर हैं। ब्रिटेन के वित्‍त मंत्री  फिलिप हैमंड और वित्‍त मंत्री  अरूण जेटली के बीच  नई दिल्‍ली में हुई नौंवी ब्रिटेन-भारत आर्थिक और वित्‍तीय वार्ता के अंत में जारी किए गए संयुक्‍त वक्‍त्‍व्‍य की मुख्‍य बातें।
 भारत और ब्रिटेन, दोनो देशों के वित्‍त मंत्रियों ने इस बात पर विचार किया कि ब्रिटेन में अनुच्‍छेद 50 के लागू किए जाने के बावजूद, भारत और ब्रिट्रेन किस तरह मौजूदा आर्थिक भागीदारी को और मजबूत करने के लिए मिल कर काम कर
सकते हैं, ताकि नवम्‍बर 2016 में ब्रिटेन की प्रधान मंत्री सुश्री मे की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा तय की गई भारत-ब्रिटेन महत्‍वपूर्ण साझेदारी को मूर्त रूप देने के लिए परस्‍पर व्‍यापार और निवेश बढ़ाया जा सके।
दोनों देश जी-20, आईएमएफ, विश्‍व बैंक और अन्‍य बहुराष्‍ट्रीय निकायों में सहयोग सुदृढ़ करने के लिए मिल कर काम करने का वायदा करते हैं। 
भारत और ब्रिट्रेन ने सहमति व्‍यक्‍त की है कि वे 'भारत-ब्रिट्रेन आर्थिक नीति एवं समृद्धि साझेदारी' (ईपीपीपी) सहित, आर्थिक ज्ञान और विशेषज्ञता साझा करते रहेंगे।  

भारत और ब्रिट्रेन के बीच व्‍यापार और निवेश बढ़ रहा है और दोनों देश इस बात की पुष्टि करते हैं कि विदेशी निवेशक के साथ एक-दूसरे देश में कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा।
 दोनों देशों ने तय किया कि अगली वार्ता 2018 में लंदन में आयोजित की जायेगी।