संविधान की धारा 74 को अनदेखा कर नगर निगम पर थोपी गयी है 'एस पी वी'
![]() |
| सर्वश्री डा शिरोमणी सिंह,अभिनय प्रसाद,कर्नल(रि)उमेशवर्मा, अनिल शर्मा आदि हरियाली वाटिका में पत्रकारों से बार्ता करते हुए। |
आगरा: ताज सिटी से स्मार्ट सिटी अवधारणा का विरोध शुरू हुआ है,कांग्रेस पार्षद दल के नेता डा शिरोमणी सिंह ने सिविल सोसायटी के अध्यक्ष के रूप में बुलाई प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि आगरा नगर निगम में स्मार्ट सिटी का प्रस्तापव पारित करवाने वालों में वह भी शामिल थे किन्तुं नगर निगम
सदन में रखे और पारित किये गये प्रस्ताव में तमाम बातें छुपाई गयी थीं।अन्य को अगर छोड भी दिया जाये तो कम से कम यह तो पार्षदों को बताया ही जाना चाहिये था कि स्पेशल परपज व्हैकिल ( एस पी वी) के तहत नगर निगम का प्रबंधन हस्तांतरित करने की तैयारी है।डा शिरोमणी सिंह ने कहा कि जैसे ही स्पेशल परपज व्है किल काम शुरू कर देगा नगर निगम सदन ‘ठलुआ क्लब’ बनकर रह जायेगा। एस पी वी के नाम पर नौकरशाही की नागरिकों के टैक्सक से दोहित नगर निगम के टैक्सू और संसाधनों पर मौजूदा पकड और पक्की् हो जायेगी।
इंडियन सिविल सर्विस के पूर्व अधिकारी (रि.) उमेश वर्मा ने कहा कि नागरिकों के हित और उनकी लोकमहत्व की व्यवस्थाओं के प्रबंधन में प्रत्यक्ष भागीदारी जन संसाधनों के सदोपयोग के लिये जरूरी है। संविधान का नगरी निकायों के लोकतांत्रिक स्वोरूप एवं शहर की व्यावस्थाीओं के प्रबंधन भागीदारी सुनिश्चिकत करने वाला 74 वां संशोधन केवल कांग्रेस या स्व राजीव गांधी किया हुआ नहीं है उसे अन्य पार्टियों का भी समर्थन था,दुर्भाग्यि अब इसे खत्म कर दिये जाने की योजना पर आगरा सहित देशके तमाम महानगरों में काम शुरू हो चुका है। कर्नल वर्मा का मानना है कि स्मार्ट सिटी के प्रस्तावित कामों में से एक भी ऐसा नहीं हे जिसके बारे में नगर निगम के पार्षद समझ नहीं रखते हों ।
इसी अवसर पर आगरा के बाजारों के फुटकर और फेरी लगाकर कारोबार करने वालों की ओर से सौ से ज्यादा प्रतिनिधि मौजूद थे। इन सभी ने एक मत होकर कहा कि छोटे कारोबारियों का आगरा में अधिकारी उत्पीडन करते आ रहे हैं, नगर निगम के कंपनी के हाथ में पहुंच जाने की खबर से उनमें अपने भविष्य को लेकर भारी बेचैनी और अनिश्चिंतता है। वे स्माेर्ट सिटी के विरोध में साथ होंगे।
सोशल एक्टिीविस्ट अभिनय प्रसाद ने कहा कि स्माार्ट सिटी कंसैप्टं को जितना उन्होंने समझा है उसमें ठेला रेउडी , फेरी लगाकर माल और छोटी मोटी किन्तु महत्वंपूर्ण सेवाये बेचनं वालों के लिये कोई जगह नहीं है जबकि आगरा का जनजीवन जिस माईक्रो इकनामी पर आधारित है, उसमें मुख्य योगदान इन्हीं वर्गो समूहों का है।जनता को कंपनियों से राहतभी मिलती है जबकि वे प्रतिस्पिर्धी स्थिति में हों। जबकि नगर निगम में प्रवेश करने वाला एस पी वी विशुद्ध एकाधिकारी और सरकारी खजाने के वेतन भोगियों की ऐसी जमात का जमावडा होगा जिसके लिये जनप्रतिक्रिया जानना अनिवार्यता नहींमहज एक औपचारिकता भर होगी।
श्री अनिल शर्मा ने कहा कि स्माजर्ट सिटी की व्यजवस्थााये लागू हो जाने के बाद नगर निगम का सदन एक दम ठलुआ क्लब सा हो जायेगा। प्रत्यपक्ष विदेशी निवेश और उसकी सुरक्षा व उससे भरपूर मुनाफा कमने जैसे काम एस पी वी के प्रबंधन में बैठे अफसरों को करने होंगे फिर कैसे जनहित की उम्मीमद की जा सकती है।
