--रसातल पर पहुंचने से पहले 1948 से अब तक पाकिस्तान हॉकी में आठ मैडिलों सहित दस पदक हांसिल कर चुका है।

(आतंकवाद की भेंट चढे पाकिस्तान में खेल)

नई दिल्ली: आतंकवाद के खेल में उलझा पाकिस्तान
इस बार अपनी हाकी टीम को भी रियो नहीं भेज सका। कुल 7 खिलाडियों का दल ही रियो गया
है, जबकि हाकीके खेल में टीम में 11
खिलाछी तो मैदान पर ही होते हैं।अगर कोई करिश्मा नहीं हुआ तो इस बार पाकिस्तान ऑलंपिक
में भागीदारों की पदक सूची से तो बाहर होगा ही , साथ ही उसके
खिलाडी बिना किसी उपलब्धि के उपने देश की उपस्थिति दर्ज करवाने तक ही सरमित रहजयेंगे।
जबकि पूर्व में पाकिस्तान
भारत के साथ हॉकी में कडी चुनौती वाला खेल खलता आ रहा था।
भारत के साथ हॉकी में कडी चुनौती वाला खेल खलता आ रहा था।
पाकिस्तान पाकिस्तान अपने खेलों को लेकर गंभीर
नहीं है। खेलों की प्रति उसकी नजरअंदाजी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है
कि पाकिस्तान की ओर से इस बार सिर्फ सात खिलाड़ी ओलंपिक में भाग लेंगे। भारत की ओर
से 119 खिलाड़ी
ओलंपिक में शिरकत करेंगे।
भारत के साथ क्रिकेट में बराबरी करने वाले
पाकिस्तान के लिए सबसे खराब बात यह है कि बरमूडा जैसे छोटे देश से उससे ज्यादा
खिलाड़ी ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर गए। इसके अलावा इस बार पाकिस्तान की हॉकी टीम
भी ओलंपिक में नजर नहीं आएगी। यह पहली बार है कि पाकिस्तान की टीम इस बार हॉकी के
मैदान में नहीं उतरेगी।
पाकिस्तान सरकार के लिये सबसे अधिक शर्म की बात यह है कि उसके सातों में से किसी भी खिलाड़ी ने अपने प्रदर्शन से इन खेलों में सीधे तरीके से क्वालिफाई नहीं किया है। तीन खिलाड़ियों को महाद्वीप का कोटा दिया गया है और बाकी चार खिलाड़ी वाइल्ड कार्ड के जरिए रियो जाएंगे।
पाकिस्तान सरकार के लिये सबसे अधिक शर्म की बात यह है कि उसके सातों में से किसी भी खिलाड़ी ने अपने प्रदर्शन से इन खेलों में सीधे तरीके से क्वालिफाई नहीं किया है। तीन खिलाड़ियों को महाद्वीप का कोटा दिया गया है और बाकी चार खिलाड़ी वाइल्ड कार्ड के जरिए रियो जाएंगे।