-- अंतर्राष्ट्रीय योगदिवस
कार्यक्रम आयोजन तक में रोडे अटकाने को की गयी कोशिश

श्रीअचलकुमार शर्माएवं श्री जितेन्द्रचौहानआदि प्रेंसवार्ता करतेहुए।
--फोटो:असलम सलीमी

--फोटो:असलम सलीमी
आगरा: पालीवाल पार्क में चलने
वाली योग, जोगिंग, प्राणायाम जैसी जनस्वास्थ्य बर्धाक
गतविधियों को प्रदेश सरकार का एक वर्ग शासन के लिये चुनौतीपूर्ण माकर निहायत
संकीर्ण नजरिया रखता है और अतिवादी दृष्टिकोण रखकर इनपर तत्काल रोक लगाना चाहता
है, यह जानकारी पार्क से जुडे एक्टिव ग्रुपों के संगठन ‘पालीवाल पार्क प्रात: कालीन भ्रमणकारी परिवार ‘( Paliwal Park
Morning walker’s Family) को उस समय हुई जब कि अंतराष्ट्रीय
योगदिवस के अवसर पर जनस्वास्थ्य को
समर्पित कुछ आयोजनों के लिये यहां तैयारियों को किया गया।पार्क परिवार के संरक्षक श्री अचल कुमार शर्मा ने कहा है कि पार्क आम जनता की आवाजाही के लिये हमेशा एक सहज पहुंच वाला ससर्वजनिक स्थान रहा है यहां के लिये सरकार के मुलाजिमों की मौजूदा सोच बेहद कष्टकारी है। श्री शर्मा ने कहा कि आसपस ही नहीं आगरा महानगर तक में तमाम बार सुलहकुल के माहौल को खराब करनेवाली घटनायें घटी हों किन्तु पार्क के भ्रमणार्थियों को लेकर अब तक कभी भी उद्यान विभाग या प्रशासन ने सवाल खडे नहीं कये।
समर्पित कुछ आयोजनों के लिये यहां तैयारियों को किया गया।पार्क परिवार के संरक्षक श्री अचल कुमार शर्मा ने कहा है कि पार्क आम जनता की आवाजाही के लिये हमेशा एक सहज पहुंच वाला ससर्वजनिक स्थान रहा है यहां के लिये सरकार के मुलाजिमों की मौजूदा सोच बेहद कष्टकारी है। श्री शर्मा ने कहा कि आसपस ही नहीं आगरा महानगर तक में तमाम बार सुलहकुल के माहौल को खराब करनेवाली घटनायें घटी हों किन्तु पार्क के भ्रमणार्थियों को लेकर अब तक कभी भी उद्यान विभाग या प्रशासन ने सवाल खडे नहीं कये।
पार्क परिसर स्थित प्रहरी
वाटिका में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित
करते हुए बताया कि पार्क की दशा में सुधार
के लिये तो प्रशासन उद्यान विभाग से उसके दायित्व में आने वाले कार्यकरवाता नहीं
उल्टे उन एक्टिविस्ट ग्रुपों की गतविधियों और आयोजनों पर संदेह खडे कर रहा है
जो कि अपने सीमित संसाधनो पर संदेह खडे कर
रहा है जो कि अपनी संसाधन सीमित होने के बावजूद पार्क को हराभरा करने को सत्त
प्रयासरत रहते हैं।उन्होंने इस संबध में सहयोग, प्रहरी,पालीवाल पार्क ईको कलब , ग्रीन क्लब तथा विशाल
वाटिका आदि सक्रिय नागरिक समूहों का खास तौर से उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि अब
तक पार्क पर इन संगठनों के निजी प्रयासों से लगभग 40 लाख रूपये के हरियाली की
सघनता को बढावा दिये जाने वाले कार्य हो चुके हैं।
श्री शर्मा ने कहा कि
पार्क में भ्रमणकारियों के ग्रुपों के
प्रति संदिगधता के जो कारण लालफीताशाही की फायलों में अगर दर्ज हैं तो उनका
खुलसा चाहते हैं , इसके साथ ही वह यह भी जनजनकरी में लाना चाहते हैं कि पार्क की व्यवस्था
के लिये उद्यान विभाग की ओर से क्या व्यवस्थायें हैं,
सिचाई की जरूरत को पूरा करने का क्या प्रबंध है। उन्होंने कहा कि पार्क के नाम
का उल्लेख करने वाली एक पट्टिका तक उद्यान विभाग नहीं लगवा सका है।
समाज सेवी श्री जितेन्द्र
चौहान ने कहा कि उन्होंनेकहा कि पार्क का जो स्वरूप वर्तमान में हैं उसमें
हिरयाली केवल उसीक्षेत्र मे सीमित रहगयी है जहांकि एक्टिविस्ट ग्रुप सक्रिय हैं।
उद्यान विभाग की सीधी जिम्मेवारी में आने वाले गांधीगर साइटवाले भाग में नाम
मात्र की हरियाली है। यही नहीं पार्क की लाइटिंग व्यवस्था तक नागरिक संगठनों के सहयोग
से ही संभव हो पा रही है।
उल्लेखनीय है कि पालीवाल
पार्क का नाम रूप से सिटी र्क आगरा था, बाद में यूनाइटिड प्रोविंस आगराएंड
अवध के जनवरी 1907 से सितम्बर 1912 तक
लैफ्टीनेट गर्वनर रहे सर जोहृन प्रेसीकोट हैविट (Sir John Prescott
Hewt ) के नाम पर इसका नाम हैविट पार्क रख दिया गया। हकीकत में इस
पार्क का लमबेचौडे भाग को डिमार्केशन कर बृहद भूभाग वाला बनाये जाने और आगरा नहर के
नेवीगेशन चैनल से इरीगेशन चैनल के रूप में 1905 में रिस्ट्रैकचरिंग करने से बचे पानी को पार्क तक पहुंचवाने
का काम हैविट साहब की खास दिलचस्पी से उनके कार्यकाल में ही संभव हो सका था।अफीम को
सरकारी राजस्व के आये स्त्रोत से हटवाकर उत्पादन को हातोत्साहित कर जरूरी दबाओं
तक सीमित करवाने में उनका अभूतपूर्व योगदान था। बाद में इसका नाम नगर महापालिका ने
प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी स्वकृष्णदत्त
पालीवाल के नाम पर रख दिया गया।बताया जाताहै कि पालीवाल जी का पार्क से बेहद लगाव था
और वह रोज प्रात: भ्रमण के लिये यहां पहुंचा करते थे।