13 मई 2016

करोड़ों रुपए खर्चे कर भारत भाग लेता है फ्रेंच फिल्म फेस्टिवल में, परिणाम खास नहीं

' लंच बॉक्स ' को बहुत पसंद किया था फ्रेंच दर्शकों ने 


हर साल की तरह इस साल भी भारत ने  फ्रांस के कैन फिल्म फेस्टिवल ने अपना पंडाल लगाया है।चाहें हमारी बॉलीवुड स्टाइल की फिल्मों को वहां  सफलता मिले या नहीं, सरकार के अनुमानित बारह करोड़ रुपए खर्चे के साथ  भारत अपनी  फ़िल्में  के साथ  वहां हर साल की तरह वहां  मौजूद है।  बॉलीवुड स्टाइल की  फिल्में को  अरब देशों के अलावा विश्व स्तर पर सफलता नहीं मिल पा रही है। एक समय था जब १९४६ के केन फेस्टिवल  में चेतन आनंद की हिंदी फिल्म ‘नीचा नगर’ ने  सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार हांसिल किया  था। 1956 में सत्यजीत राय की ‘पथेर पांचाली’ फिल्म को १९५६ में यह पुरस्कार मिला था । इसके अतरिक्त स्पेशल जूरी अवार्ड फिल्म ‘खारिज’ (1983)  और आडियंस अवार्ड मीरा नायर की ‘सलाम बॉम्बे’ (1988) को मिला था। किन्तु भारत की कुछ फिल्मों  जैसे लंच बॉक्स , महिलाओं का मौसम , वाटर अदि को फ्रेंच दर्शकों ने काफी पसंद किया। यह सब  फ़िल्में वास्तविक जिंदगी से काफी नज़दीक हैं। बताया जाता हैं  महिलाओं का मौसम और वाटर फिल्में भारत में प्रतिबंधित हैं।