--उर्दू एक तहजीब का प्रतीक, घरों तक जरूर पहुंचनी चाहिये
आगरा, प्रख्यात साहित्यकार एवं उर्दू अदब के खिदमदगार पदमश्री राम सुर्ररहमान
फारुकी को बज्म
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| (डा आर एस फारुकी सम्मानित होने के बाद सहयोगि यों के साथ सैय्यद अजमल अली शाह कादरी नियाजी) --:फोटो असलम सलीमी |
ए मैकश ,आगरा के तत्वावधान में आयोजित
26वें ‘याद ए मैकश ‘ के अवसर पर आयोजित
कार्यक्रम में ‘वर्ष 2015 अलमा मैकश अकबरावादी नेशनल एवार्ड ‘ से नवाजा सम्मानित किया गया। बज्म
ए मैकश के संरक्षक सैय्यद अजमल अली शाह कादरी नियाजी ने उन्हें स्मृति चिन्ह, सम्मानपत्रऔर शाल भेंट किया।सैय्यद शब्बर अली शाह ने चांदी का पदक भेंट
किया।
ग्रांड होटल के हॉल में हुए इस सम्मान समारोह में
अपने प्रति व्यक्त की गयी भावनाओं से श्री फारुकी भावुक हो गये और कहा कि आगरा की
अपनी तमाम खासियतें )हैं, उर्दू और अन्य
लिट्रेचर की खिदमत वाले यहां हमेशा रहे
हैं। मैकश साहब से मुलकात का उनका पुराना सिलसिला
है। मावाकटरा उनका पुराना आना जाना रहा है। तमाम सम्मानों और अपनी बात को रखने के मिलते रहे मौकों के बावजूद यह कार्यक्रमउनके लिये खास महत्व रखता है।मको सम्बोधित करते हुए डा भीमराव अम्बेडकर विश्विद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मौहम्मद मुज्जमिल अली ने कहा कि फारुकी साहब अपने आप में एक नायब शख्सियत हैं, जो कुछ कहते हैं उसके पीछे बहुत बडा सोच और अध्ययन होता है। यही कारणहै कि आकशवाणी के लखनऊ केन्द्र के द्वारा दसियों साल पुरानी रिकार्डिंग को अब भी जब तब अपनीआर्काइव से निकाल कर सुनाना पडता है। यही नहीं वह अब भी एक दम ताजी ही लगती है।
श्री मुज्जमिल अली ने कहा कि
उन्हे फारुकी साहब के किताबें पढने के शौक का अंदाज उस समय से है,जबकि वह उनके छेटे भाई के साथ ही इंगैंड के
एक विश्विद्यालय में पडाने का काम करते थे, उसी समय श्री
फरुकी ने इंगलैंड से एक किताब भेजने को कहा जो बडी ही मुश्किल में एक ऐंटीक
किताबे बेचने वाली दूकान से ढूढ निकाली किन्तु अत्यंत महंगी होने के कारण उसे
खरीदने से बचने की भी कोशिश की किन्तु फारुकी साहब के शौक और किताब के लिये
बेसब्री से इंतजार के आते रहे खतों और फोनों से अंतत: उसे खरीद कर भेजना ही पडा।
अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय
में फारसी विभाग के असिस्टंट प्रोफेसर मौहम्मद कमर आलम ने ‘मैकश अकबरावादी मसायेले तस्सवुफ ‘ ए एम यू के ही डा अब्बास हैदर चिश्ती ने अहले बैते नबीऔर उम्मत की पश्त
पनाही’ तथा तथा इलियास राम्सी लोहरानी टोंक (राजस्थान) के
हाफिज मौहम्मद जिया उद्दीन ने भी मैकश साहब के उर्दू लिट्रेचर के खिदमद के अंदाज
पर विषय परकशोध पत्र प्रस्तुत किया।
बज्म ए मैकशकी सैकेट्री डा
नसरीन बेगम के द्वारा अपने अंदाजमें तीन घंटे से अधिक समय तक चले कार्यक्रम के
संचालन में विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर
सैय्यद अमीन मियां कादरी बरकतीने कहा कि आगरा की जिन खासियतो और शख्सियतों के
लिये पहचान है उनमें मैकश साहब और उनके इंसानित को बल देने वाले खयालात भी हैं।बज्म ऐ मैकश के पूर्व सैकेट्री जनाब
अमीर अहमद एडवोकेट ने कहा कि आयोजन का सिलसिला अपन आप में एक बडी कामयाबी है जिसका
सैहरा उन पर है जो कि आयोजन के अवसर पर हमेशा मौजूद होते रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में याद ए
मैकश के संरक्षक सैय्यद अजमल अलीशाह कादरी नियाजी ने शाल ओढाकर श्री फारुकी सहित
अन्य विशिष्ठ जानों को सम्मानित किया।
इा अवसर पर इप्टा आगरा के
द्वारा मैकश साहब के सुलह कुल नजरिये को दृष्टिगत एक चि. और पोस्टर प्रदर्शनी का
आयोजन भी कर मैकश के सफर को बयां करने की आपे अंदाज में नायब कोशिश की गयी।इस
परिकल्पना को साकार करने में इप्टा के डा विजय शर्मा, विशाल रियाज,और
शैलेन्द्र आदि की मुख्य भूमिका रही। प्रदर्शनी की डा अम्बेडकर विश्वविद्यालय के वी सी प्रोफेसर मौहम्मद मुज्जमिल अली ने
प्रशंसा कर मुख्यआतिथि के रूप में दिये अपने भाषण में खास उल्लेख किया।
आयोजन में सहयोग के लिये नवेद
अजहर सिद्दकी, हाजी इम्तयाज हुसैन, जाहिद हुसैन, डा विजय शर्मा,
अख्तर उवैसी,नियजी, अफजल अहमद आदि को
ट्रैाफी प्रदान की गयी।सर्वश्री शाहिद नदीम, ाइ्रदुल्ला
माहिर अकबरा बादी, उजाज उद्दीन नियाजी,
सय्यद सिनवान शाह, सैय्यद शमीम शाह, ड
अमिता त्रिपठी, प्रा वेद त्रिपाठी, डा
लता चन्देला, ,अरुण डंग,शशि टंडन, डा सिराज अनमलि ,अनिल
अरोडा संघर्ष आदि भी उपस्थितों में शरीक थे।

