19 अप्रैल 2016

श्रीमती सत्यवाला जैन के नेत्रदान से दो को मिली ज्याेति

--आगरा विकास मंच ने प्रेरक बता जैन परिवार के प्रति जताया आभार
आगरा: नेत्रदान के फार्म तो काफी लोग भरते हैं और आंतरिक रूप से इसके लिये तहेमन अभिलाशा
(नेत्रदान:1987 में डॉक विभाग ने जनजागरूकता एवंप्रेणा के
 लिये एक पोस्‍टल स्‍टांप भी किया था जारी।)
भी रखते हैं, किन्‍तु यह सौभाग्‍य कम को ही मिलपाता है,क्‍यों कि अक्‍सर नेत्रदान के लिये जरूरी शल्‍य प्रक्रिया परलोक सिधारने के बाद किये जाने का प्रचलन है, उस वक्‍त उसके परिजन,सहोगियों पर ही उसकी इस इच्‍छा पूरी करने का दायित्‍व होता है। प्रतिष्‍ठित जैन परिवार के श्री वनवारी लाल जैन की पत्‍नी श्रीमती सत्यवाला जैन ने भले ही जीते जी नेत्रदान करने का
कमिटमेंट किसी आई बैंक से नहीं किया हो किन्‍तु संसार से विदो होने के बाबजूद दो व्‍यक्‍तियों को नेत्र ज्‍योति जरूर प्रदान कर गयीं।

अपने परिजनों के साथ श्री बनवारी लाल जैन ने राजकुमार जैन ,सुशील जैन एंव सन्देश जैन से नेत्रदान हेतू सम्पर्क किया।जिस पर रात्री 11.30 बजे एस.एन. मेडीकल काँलेज की डा.शैफाली जी एंव डा. अभिषेक जी एंव क्षेत्र बजाजा कमेटी के सहयोग से नेत्रदान प्रक्रिया संपन्‍न हुई। संयोग से यह परकल्‍याण के लिये कर्म करनेको प्रेरक रहे महावीर जयंती का पावन दिवस भी था ।इस प्रकार भगवान महावीर स्वामी जी के जन्म कल्याणक के पावन अवसर पर दो दृष्टिहीनों को नेत्र ज्योति प्रदान की गई।
आगरा विकास मंच के अध्यक्ष अशोक जैन सी.ए. ने नेत्रदान कर्ता के परिजनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महावीर जयन्ती के अवसर यह किया महान सेवा कार्य सभी को प्रेरणा प्रदान करेगा।इस सेवा कार्य से जन्म कल्याणक मनाना सार्थक हो गया।
डा. आर. एस. पारेख, सुनील विकल, डा. सुनील शर्मा, डा. ज्ञान प्रकाश, डा. बी.के. अग्रवाल , डा. रमेश धमीजा, सुशील जैन सी.ए.ने संयुक्त रुप से श्री बनवारी लाल जैन के परिवार के सामाजिक दायित्‍व बोध को अनुकरणीयबताते हुए समाज के सभी वर्गों से नेत्रदान के लियेआगे आकर नेत्र दान आन्दोलन मै अपना सहयोग करने की अपील की है।

सूर स्‍मारक मंडल के मंत्री श्री भुवनेश श्रोत्रिय ने कहा है कि नेत्रदान का यह योगदान अत्‍यं महत्‍वपूर्ण है,मंडल दिवंगता श्रीमती सत्‍यवाला जैन के परिवार से संवेदना व्‍यक्‍त करते हुए उन्‍हें श्रद्धाजलि अर्पित करता है।उन्‍होंने जैन परिवार के द्वारा परोपकार प्रेरित कार्य को अनुकरणीय करार दिया है।