--दो साल के भीतर पी एम ओ के जनसंपर्क के स्तर में भारी गिरावट
आगरा: दो सालें से न तो
बदलाव और नाही पिछले चार साल से जनजीवन पर प्रतिकूल असर डालने वाली
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| (अच्छे दिन:पहले राजनीति के नाम पर बिखरे पडे कचडे की सफाई तो हो) |
नीतियों में
ठहराव। यह है उत्तर प्रदेश के आम आदमी का यथार्त । किन्तु सबसे आश्चर्यजनक है कि जहां
सपाई अपने शासन काल में राशन वितरण और पानी
जैसी आम जरूरत की सुनिश्चितता कर सके हैं वहीं भाजपाई केंद्र सरकार के द्वारा आम
नागरिक की मुश्किलें दूर करने में रही भूमिका
को नकाार रहे हैं। और बाते अगर छोड भी दी जायें तो पी एव ओ के द्वारा जनता के पत्रों
के जबाव देने तक के स्तर में भारी गिरावट आयी है।..
उधर समाजवादी पार्टी की
अगुवाई वाली उत्तर प्रदेश सरकार पर प्रहार करते हुए भाजपा नेता वरुण गांधी ने वाराणसी
में कहा कि राज्य में बढ़ती बेरोजगारी ने स्नातक और पीएचडी धारकों को
सफाई कर्मी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदों के लिए आवेदन करने के लिए बाध्य
कर दिया है।
अमरोहा नगर निगम की ओर से सफाई कर्मचारी
पदों के लिए आवेदन हेतु निकाले गए विज्ञापन का जिक्र करते हुए गांधी ने दावा किया
कि 19000 आवेदकों में
ज्यादातर स्नातक और स्नातोकोत्तर हैं।
उन्होंने कहा कि यहां तक कि पीएचडी धारकों
ने भी सचिवालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदों के लिए आवेदन किया है।
उन्होंने यहां एक निजी प्रबंधन संस्थान
में कहा, ‘‘बढ़ती बेरोजगारी
ने उच्च शैक्षणिक योग्ताआ वाले लोगों को भी ऐसे छोटे पदों के लिए आवेदन करने के
लिए बाध्य कर दिया है क्योंकि राज्य में नौकरी के अवसर नहीं हैं।’’ गांधी ने कहा कि नौकरशाही, लालफीताशाही और बढ़ती
अपराध दर राज्य में उद्योगों के लगाये जाने के रास्ते में बड़ी रुकावटें हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार अन्य राज्यों की तुलना में घरेलू और विदेशी निवेशकों को
आकषिर्त करने में विफल रही है।
