15 मार्च 2016

प्राकृति का उपहार पानी अब नहीं बिकेगा

अंतर महाविद्यालयी भाषण प्रतियोगिता में पानी के कारोबार पर बरसे युवा 

 (कालिन्‍दी महाविद्यालय के मंचपर  बैठे मुख्‍यातिथि एवं अन्य )

 ...दिल्ली, ”मन्त्रणा वाद-विवाद परिषदकालिन्दी महाविद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय) एवॅ जलाधिकार फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित 9मार्च 2016 को अंतर्महाविद्यालयी भाषण प्रतियोगिता में युवाओं ने जल बैचने का कडा़ विरोध किया और कहा की पानी स्वयं में प्रकष्ति हैजीवन है इसका व्यवसाय जीवन को बैचने जैसा है जिसे बरदाष्त नहीं किया जा सकता ...

           कालिन्दी महाविद्यालय में आयोजित प्रतियोगिता में दिल्ली विष्वविद्यालय के 20 महाविद्यालयों के 38 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया । जिसमें उन्होनें कहा कि हवा व प्रकाष की भांति पानी भी निःषुल्क मिलना चाहियेइसकी बिक्री तत्काल प्रभाव से बन्द होनी चाहिये । बोतल बन्द पानी जो एक जहर है इसे सरकार को तुरन्त प्रभाव से प्रतिबन्धित करना चाहिये क्योंकि इसमें बीपीए नाम का टोक्सीक होता है जो मनुष्य की किडनीलीवरहार्ट की बीमारीडायबिटीज आदि बीमारियों को बढाता है तथा बालों का टूटना एवॅ दांतों की गम्भीर बिमारी में भी सहयोगी होता है ।                                                                                                                          सभी प्रतिभागियों ने सर्व-सम्मति से यह स्वीकार किया और जोर देकर कहा की पानी चूंकी प्रकष्ति ने दिया है और प्राणी मात्र के लिये जीवन को जीने के लिये दिया है अतः इसका मालिक प्राणी मात्र के अलावा और कोई हो ही नहीं सकता । जब प्राणी मात्र ही इसका मालिक है तो फिर सरकार को अपना दायित्व एक न्यासी की भांति निभाना चाहिये ना की इसको मालिक बनकर बैचना चाहिये । सरकार ने जो रेल्वे में पानी बैचना प्रारम्भ किया है इसे तत्काल बन्द करना चाहिये यह अत्यन्त ही दुर्भाग्यपूर्ण है ।                                                                 इस प्रतियोगिता में उन्होनें जल संचयपानी की बर्बादी सहित तमाम मुददों पर रवुलकर चर्चा की और कहा की यदि जल संचय के परम्परागत तरीकों को समाप्त नहीं किया जाता तो हाल ही में हुयी चैन्नईकष्मीरउतरारवण्ड की त्रासदी को रोका जा सकता था । 
भाषण प्रतियोगिता के जज दीनदयाल अग्रवालदीवान सिंहआषीष सरकार व राहुल षर्मा ने समस्त प्रतिभागियों को सुनने के बाद अंजू को प्रथम,गोपाल को द्वितिय व अनुराग को तष्तीय विजेता घोषित किया । इस दौरान मुख्य अतिथि स्वामी चिदरुपानन्द जी महाराजचिन्मया मिषन ने जल के साथ साथ प्रकष्ति प्रदत समस्त सुविधाओं के सम्मान करने की बात कही । उन्होनें कहा की समय रहते मनुष्य को पानी की एक-एक बूंद को सहेज कर ररवना होगा अन्यथा देष में विकराल स्थिति उत्पन्न हो जायेगी ।                                   चर्चा के दौरान सौरभ गांधी ने अपने वक्तव्य में छात्रों को बताया कि किस तरह पानी के व्यवसायीकरण की मार दिल्ली की जनता झेल रही है । छात्रों से पानी के टैरिफ पर जब गांधी ने पूछा कि किसी छात्र को दिल्ली के पानी के टैरिफ की दरें पता है तो कोई भी जवाब नही मिल पाया जिस पर सौरभ गांधी ने इस विषय पर विस्तार से छात्रों को बताया कि किस तरह दिल्ली के पानी के टेैरिफ की दरें जनता पर लगाई जाती है जिस पर सभी छात्रों को अचरज हुआ । उससे भी बडा अचरज उन्हें तब हुआ जब हवा से भागने वाले मीटर को छात्रों ने देरवा । सौरभ गांधी ने वहाॅ उपस्थित छात्रों से अनुरोध किया की वो पानी की आजादी के लिए 20 मार्च को दौड का हिस्सा बन कर जलाधिकार की मुहिम को सफल बनाये ।