5 फ़रवरी 2016

ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पतालों का न होना सबसे बड़ी चुनौती

मेडिकल की बेसिक जानकरियां स्कूली कोर्स में हों शामिल 

केंद्रीय  राज्‍यमंत्री डा रामशंकर कठैरिया ने किया उद्घाटन


आगरा। क्रिटीकल केयर जैसी एडवांस सुविधा तो दूर की बात है, हमारे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतरअस्पताल भी नहीं हैं। शहरों में चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी-बड़ी सुविधाएं हैं। लेकिन गांव में अस्पताल तक नहीं। यह हमारे लिए बहुत बड़ी चुनौती है। और इस चुनौती को देश के डॉक्टरों के साथ मिलकर ही दूर किया जा सकता है। मेडिकल की बेसिक जानकारी स्कूली कोर्स में शामिल होनी चाहिए।यह कहना था केन्द्रीय मंत्री रामशंकर कठेरिया का। वह होटल जेपी पैलेस में आयोजित क्रिटीकेयर-2016 के बैश्विक सम्मेलन के उद्घाटन समारोह (इंडियन सोसायटी ऑफ क्रिटीकल केयर मेडिसिन की 22वीं कांफ्रेंस) में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।...
कहा कि क्रिटीकल केयर बेहतर हो इसके लिए पैरामेडिकल स्टॉफ का भी स्किल्ड होना जरूरी है। हमारी बदलती जीवन शैली और खान-पान नए रोगों की गिरफ्त में हमें जकड़ रहा है। उन्होंने कांफ्रेंस में मौजूद इंटरनेशनल सेप्सिस फोरम व यूरोपियन सोसायटी ऑफ इंटेसिव केयर मेडिसिन के लगभग 200 सदस्यों का भारत की ओर से स्वागत किया।


कांफ्रेंस का शुभारम्भ मुख्य अतिथि राम शंकर कठेरिया, सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार अय्यर, आर्गनाइजिंग कमेटी के डॉ. रणवीर सिंह त्यागी, डॉ. सुभाष चंद्रा, डॉ. राकेश त्यागी, डॉ. दीप्तिमाला अग्रवाल, डॉ. अतुल कुलकर्णी, डॉ. शुभ दीक्षित ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने सोसायटी की सोविनयर का भी विमोचन किया। आईसीसीएम (इंडियन सोसायटी ऑफ क्रिटीकल केयर मेडिसिन) की ओर से इंटरनेशनल सेप्सिस फोरम व यूरोपियन सोसायटी ऑफ इंटेसिव केयर मेडिसिन के मुख्य सदस्यों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया।
डॉ. शिव कुमार अय्यर ने कहा कि हमारी सोसायटी ह्यूमन रिसोर्स डवलपमेंट के साथ मिलकर काम करना चाहती है। यूथेनेसिया के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को इसमें नया प्रावधान लाना चाहिए। डॉ. रणवीर त्यागी ने सोसायटी का परिचय दिया। अंत में डॉ. राकेश त्यागी ने अतिथयों को धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. राकेश भाटिया ने किया।
 सामान्य बुखार भी सेप्सिस बनकर जानलेवा हो सकता है
आगरा। लोगों की प्रतिरोधकता के लगातार कम होने से सेप्सिस (अंदरूनी रूप से किसी भी अंग में इनफेक्शन होना) दुनिया में खतरनाक तरीके से मौत कारण बन रहा है। लोगों में जागरूकता का न होना इसके बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है। इजरायल के डॉ. चार्ल्स स्प्रंग ने बताया कि दुनिया भर में एंटीबॉयोटिक दवाओं के गलत तरीके और डॉक्टरों की सलह के बिना लेने के कारण लोगों की प्रतिरोधकता कम होने से सेप्सिस के मामले बढ़ रहा हैं।

वहीं क्रिटीकेयर बैश्विक सम्मेलन-16 में भाग लेने पहुंचे जर्मनी से आए डॉ. कोनरेड रेनहार्ट (ग्लौबल सेप्सिस एनालिसिस के चेयरमैन) ने बताया कि सेप्सिस आईसीयू में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है। इसके लिए डब्ल्यूएचओ भी चिन्तत है। क्योंकि दुनिया में हर साल आईसीयू में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण (20 मिलियन लोग मर जाते हैं हर साल) सेप्सिस है। यह समस्या मध्यम और कम आयवर्ग के देशों में यह समस्या अधिक है। सामान्य बुखार में खुद दवा लेने पर यानि सही इलाज न मिलने पर आगे चलकर यह लापरवाही सेप्सिस में बदल सकती है। इसलिए भारत जैसे देशों के लोगों को खुद चिकित्सक बनकर दवा लेने के बजाय एक्सपर्ट की सलह से ही दवा लेने की सलह दी। विशेषकर एंटीबॉयोटिक लेने के मामलों में, जो लगातार और गलत तरीके से लेने पर व्यक्ति की प्रतिरोधकता को प्रभावित करती है।