-- अलगाव वादियो
ने किया तीन दिन बन्द रखने का एलान
नई दिल्ली:
कश्मीर मे राज्य के सियासती संकट का फायदा अलगाव वादियों ने उठाना शुरू कर दिया है।
राज्य की
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| राज्य में चलती राजनैतिक अनिश्चत्ता के माहौल में अफजल गुरु के अवशेषें के मुद्दे पर गर्माई घाटी |
सत्ता में भागीदार रहे दल ने अलाववादियों की ताजा चली मुहिम पर खामोशी बरत
कर केन्द्र सरकार को स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अगर कडाई या चालाकी की गयी तो हालात
बदलते देर नहीं लगेगी। ताजा झंझट संसद हमले के दोषी अफसजल गुरू की अस्थियों को लेकर है। राजनैतिक मुददे को जनमानस से जुड हुआ बनाये जाने
के लिये फांसी की सजा के बाद से ही उनके मृत शरीर को धार्मिक रस्मों के अनुसार दफन
करने का मामला उठाया जाना शुरू हो गया था। जो कि राज्य की कानून व्यवस्था को सुचारू
रखने के लिये जेल में ही दफन कर दिया गया था। अब इसी मामले को लेकर पुन: बंद का
ऐलान किया है किया गया है।
अलगाववादी
नेताओं के कश्मीर बंद ऐलान को देखते हुए बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए गए..
हैं.अलगाववादियों ने 11 फरवरी को मकबूल भट को फांसी
पर लटकाए जाने के विरोध में भी बंद का ऐलान किया है. जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट
के संस्थापक भट को 11 फरवरी 1984 को
फांसी दी गई थी। भट को कश्मीर घाटी में एक भारतीय खुफिया अधिकारी की हत्या का दोषी
पाया गया था। उसके शरीर को भी जेल के अंदर ही दफना दिया गया था ।
प्राप्त
जानकारी के अनुसार, 9, 10 और 11 फरवरी को कश्मीर घाटी के कई इलाकों में कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लगाए गए हैं.
एहतियातन पुलिस ने कई अलगाववादी नेताओं को हिरासत में भी लिया है.।सीआरपीएफ के
आईजी अतुल कारवाल मे कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर हालात पर नियंत्रण
पाने की कोशिश है. किसी भी तरह से उपद्रव न होने देने का प्रयास किया जा रहा है।
