25 फ़रवरी 2016

हथ करघा निगम और यूपिको को बेचे जाने की तैयारियां

परिसंपत्‍तियों के मूल्‍यांकन को कमेटी गठित


आगरा, उ प्र में नये उद्योगों की स्‍थापना के प्रयास भले ही नये निवेशकों के लिये चलाये जने की कोशिश हो रही हो किन्तु पुराने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर बन्‍द हो ने की ढाल लगातार लटकी चल रही है।कभी लाखों लोगों को कताई,बुनाई और कपडा उत्‍पादन के माध्‍यम से रोजी रोटी देने वाले उ प्र राज्‍य हथ करघा निगम लि और यूपिका की स्‍थिति अत्‍यंत दयनिय है और वे भी विनिवेश यानि बेचे जाने की प्रक्रिया के दौर में जा पहुंचे हैं। उ प्र शासन के द्वारा इनके लगातार चल रहे घाटे को दृष्‍टिगत 5फरवरी को.. शासनादेश जारी कर संविलीन करने के लिये आयुक्‍त एवं निदेशक हथकरघा एवं वस्‍त्रोद्योग की अध्‍यक्षता में एक कमेटी गठित की है। कमेटी दोनों उपक्रमो के विलये क अलावा दोनों संचालन की स्‍थिति में नकारात्‍मक एवं सकारात्‍मक संभावनाओं के संबध में भी अपना मत देगी। किन्‍तु इन सबके अलावा समिति देनों ही उपक्रमो की चल अचल संपततियों का आंकलन भी करेगी। प्राप्‍त जानकारी के अनुसार दोनों ही उपक्रमोकी वित्‍तीय हालत बसपा के शासन में जहां खराब तो थी किन्‍तु संचालन योग्‍यस्‍थिति बनी हुई थी जबकि पिछले चार सालों में बदइंतजामियों और अनुत्‍पादकता के माहौल ने दोनों ही उपक्रमों को अत्‍यधिक घाटे के दौर में पहुंचा दिया है।जहां सरकार इन उपक्रमों को बेचने की रास्‍ते पर है,वहीं इनके खरीदार भी खडे है किन्‍तु मोल भाव के लिये ‘परसंपततियोंके मूल्‍यांकन को बेसबरी से उन्‍हें इंतजार है।