--उपचार
में एंटीवाइटिक का बडे पैमाने पर गलत प्रयोग
आगरा।
भारत में लगातार बढ़ रहे किडनी की बीमारी के मामले की एक मुख्य वजह पर्याप्त
संख्या

(डा रवि कुमार)
में पब्लिक टॉयलेट का न होना और जो हैं वहां सफाई का न होना एक बड़ी वजह
है। पब्लिक टॉयलेट न होने की वजह से लोग घर से बाहर निकलते से पहले और बाहर होने
पर पानी नहीं पीते। और शरीर में पानी की कमी किडनी की बीमारी को न्यौता देना है।
इतना ही नहीं घर से बाहर निकलने पर पब्लिक टॉयलेट की सुविधा न होने पर अक्सर लोग
घंटों यूरिन को रोके रहते हैं, जो बेहद खतरनाक है।
इंडियन
सोसायटी ऑफ क्रिटीकल केयर मेडिसिन की 22वीं कांफ्रेंस ( भारत की पहली ग्लोबल
कांप्रेंस) क्रिटीकेयर-2016 में दूसरे दिन अमेरिका के डॉ. रवि कुमार ने बताया कि
कई घंटों तक पानी न पीना व यूरिन को लम्बे समय तक शरीर में रोके रहना किडनी के लिए
घातक है। भारत में पब्लिक टॉयलेट की कमी की वजह से अक्सर लोगों को ऐसा करना उनकी
मजबूरी होती है। यह
मजबूरी धीरे-धीरे उनकी किडनी को प्रभावित कर रही इस बारे में
कम लोग ही जानते हैं। दूसरा जो पब्लक टॉयलेट हैं बी वहां साफ सफाई नहीं है, लिहाजा
इंफेक्शन होने की सम्बावना के साथ किडनी पर असर पड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है।
वहीं
हैदराबाद के डॉ. श्रीभूषण राजू ने बताया कि भारत डायबिटीज के रोगियों का केन्द्र
बन चुका है। डायबिटीज में प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से सबसे पहले असर किडनी
पर ही पड़ती है। डायबिटीज से होने वाली मौतों में 40 फीसदी का कारण किडनी फेलियोर
होता है। जबकि 30 फीसदी मौते हाई बीपी की वजह से किडनी पर होने वाले असर के कारण
होती हैं।
80
फीसदी किडनी संक्रमण का कारण कम्यूनिटी एक्वायर्ड बीमारियां
आगरा।
हैदराबाद के डॉ. श्रीभूषण राजू ने बताया कि भारत में किडनी संक्रमण 80 फीसदी
कम्यूनिटी एक्वायर्ड बीमारियों (निमोनिया, गेस्ट्रोएंटराइटिस, मलेरिया आदि) के
कारण होता है। इन बीमारियों का असर सीधे तौर लेकिन धीरे-धीरे किडनी पर पड़ता है।
इस प्रतिकूल प्रभाव को बिना डॉक्टर की सलह के लोगों द्वारा ली जाने वाली
एंटीबायोटिक दवाओं का असर और भी बढ़ा देता है। इसलिए लोगों को अपने आ-पास और घर
में साफ सफाई के साथ बेवजह एंटीबायोटिक दवाओं के प्रयोग से बचना चाहिए।
गेस्ट्रोएंटराइटिस की समस्या 90 फीसदी दूषित खाने से होती है। इसलिए बाहर का दूषित
खाना खाने से बचें।
हार्ट
अटैक के शुरूआती चार घंटे हैं महत्वपूर्णः डॉ. त्यागी
आर्गनाइडिंग
कमेटी के सचिव डॉ. रणवीर सिंह त्यागी ने बताया कि हार्ट अटैक आने के बाद चार घंटे
इलाज की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। यही बात दिमागी स्ट्रोक पर लागू होती है।
उन्होंने बताया कि हार्ट अटैक से मरने वालों में महिलाओं की संख्या अधिक । क्योंकि
महिलाओं और पुरुषों में इसके ल7ण अलग-अलग होते हैं और महिलाएं स्वास्थ्य की दृष्टि
से अपने ऊपर कम ध्यान देती हैं। हार्ट अटैक जैसे लक्षणों को बी नजर अंदाज कर देती
हैं। महिलाओं में हार्ट अटैक आने पर जहां खतावट, पसीना आना, बैचेनी, चिड़चिड़ाहट
और घबराहट और पुरुषों में छाती में दर्द, चक्कर, घबराहट और बेचेनी जैसे लक्षण होते
हैं।
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| (डा रवि कुमार) |