--पीर अलहाज रमजान अली शाह अमन चैन राह में इजाफे को चाहते हैं नौजवानों से ‘गुफ्त गू’
आगरा: सीरिया के साथ सुलगते वार्डर से जनित खतरों
को नजर अंदाज कर दो दिन पूर्व ही बगदाद से आगरा
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| सज्जादनशीं पीर अलहाज अलीशाह फोटो:असलम सलीमी |
बगदाद
शरीफ जनाब दरगाह हजरत शेख अब्दुल जिलानी कादरी सज्जादानशीं कासिम अली और अहमद कबीर
रुई के सज्जादानशीं पीर जहां अल जहां रमजान अली शाह गरीब रसाई के साथ भी उनकी मुलाकात
हुई। लौटे दरगाह
हजरत ख्वाजा शेख सैय्यद
फतिहउद्दीन बल्खी अलमारूफ तारा शाह चिश्ती साबरी (दरगाह मरकज साबरी ) के सज्जादा
नशीं आले पंजतानी कुतुब –ए-मुहब्बत पीर अलहाज रमजान अली शाह चिश्ती साबरी के
आगरा आगमन के साथ ही
उनके मुरीदों के मुलाकात के तेजी के साथ चल रहे सिलसिले उनकी मुरीद वालीवुड अभिनेत्री ऋषिता भट्ट भी
शामिल थीं। दोनों अदाकाराओं ने दरगाह शरीफ पर माथा टेकने के बाद सज््जादा नशीं रमजान अली शाह चिश्ती साबरी की कदम बोसी की।
उनके मुरीदों के मुलाकात के तेजी के साथ चल रहे सिलसिले उनकी मुरीद वालीवुड अभिनेत्री ऋषिता भट्ट भी
शामिल थीं। दोनों अदाकाराओं ने दरगाह शरीफ पर माथा टेकने के बाद सज््जादा नशीं रमजान अली शाह चिश्ती साबरी की कदम बोसी की।
सज्जादा
नशीं पीर अलहाज रमजान अली शाह चिश्ती साबरी
ने ‘आगरा समाचार ‘ को बताया कि कि बगदाद की यह उनकी
दूसरी यात्रा थी।पहली बार 2010 में अपनी यात्रा में अपनी बेटी को लेकर गये थे ,जबकिइस बार उनके साहब जादे पीरजादा हाजी कासिम अली शाह भी उनके साथ
उर्स-ए-गौसुल आजम में शिरकत करने गये थे। उन्हों ने कहा उनकी यात्रा का मकसद अत्यंत
कामयाब रहा।तमाम
हालातों के माकूल न होने और अपनी एतिहात खुद करने की हिदायतों के बावजूद
उन्होंने न केवल बारगाहे हुजूर गौसुल आजम शेख अब्दुल कादिर जिलानी की बारगाह में
इबादत कर रुहानी सुकून हांसिल किया साथ ही वह वह अहमद कबीर रूई के अस्थान पर भी इबादत करने गये।
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| (बगदादशरीफ दरगाह के सज्जादानशीं कासिमअली) |
सज्जादा
नशीं साबरी ने बताया कि इस समय ईराक के हालात अच्छे नहीं हैं, वहां दहशत का माहौल है।खाने के सामान की
बेहद कमी है।सबसे कष्टकारी है औरतों को भारी खौफजदां माहौल के बीच घरपरिवार की जिम्मेदारियों
को पूरा करने के लिये घरों से बाहर निकलना पड रहा है। उन्होंन ेकहा कि वह इसकीवजह 'आई एस आई एस' जो कि अब 'आई एस' के नाम से कारगर
है ,को मानते हैं। उन्होंने कहा कि हालात तो सद्दाम हुसैन
के समय से ही खराब होना शुरूहो गये थे किन्तु उसके बाद तो और भी खराब हो गये है। सीरिया
में चल रही उथलपुथल ने हालातों को और खराब करके रख दियाहै। मेरा मानना है कि दुनियां
भर में भाईचारा के पैगाम को देने वाली सूफी संतो की इस जमीं को अब दुनियां से हालातों
की बैहतरी के लिये मदद की बेहद उम्मीद है,भारत की तरफ की तरुफ खास उम्मीद है।
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| (अहमदकबीर रूई के सज्जादांनशीं रमजान अलीशाह गरीब रसाई के साथ रमजान अली शाह साहब) |
उनकी ख्वाइश है कि नौजवानों को बुलाकर उनके साथ जलसा करें और इराक व सीरिया में बने हुए उन हालातों की जानकारी तफसील से दें जिनसे उन्हें रु ब रू होना पडा था।उन्हें बताये कि इस्लाम अमन चैन को फैलाने वाला मजहब है ।
इंसानी खून खराबे से मजहब का कोई मतलब नहीं है।अगर ढूढा जायेतो ज्यादातर मामलों में इसकी छुपी वजह हुकूमतों पर कब्जा जमाने की कोशिशें ही हैं।


