--महिला या लड़की पीने को चरित्र के साथ जोड़कर देखा जाता है
आगरा: प्रख्यात व्यांगकार श्री आलोक
पुराणिक नौजवानों में नशेबाजी के विरुद्ध लगातारआवाज उठाते
रहे हैं। पेशे से अर्थशात्री और शिक्षक श्री पुराणिक मूल रुप से आगरा के हैं
और एक व्यंगकार के रूप में उनकी राष्ट्रीय पहचान भी है। उन्हें खुशीहे कि गांधी
बलिदान दिवस पर नौजवानों से मुखातिब यह सेमिनार वह बातें सामने रख पायेगा, जो बातें हम सबको समझने की हैं। नशाबंदी, शराबबंदी,
लत-निवारण, ऐसे मसले हैं जो वक्त के साथ
ज्यादा महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। शराब को लेकर हमारा समाज उदार आगरा:सेंटपीटर्स कालेज में गांधी परिनिर्वाण दिवस के दो दिवसीय
आयोजन के तहत 31 जनवरी2016 को नशा विरोधी होने वाली वॉकथन (पैदल मार्च ) के बाद युवाओं को डा सरोज प्रशांत के द्वारासंबोधित किया जायेगा।आगरा में सार्वजनिक मंच पर उनकी यह पहली अभिव्यक्ति होगी ,वैस वह नशा विरोधी कार्यक्रमों मे सहभागीरही है और इस क्षेत्र में उन्हे काफी अनुभव है।
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| (आलोक पुराणिक) |
आयोजन के तहत 31 जनवरी2016 को नशा विरोधी होने वाली वॉकथन (पैदल मार्च ) के बाद युवाओं को डा सरोज प्रशांत के द्वारासंबोधित किया जायेगा।आगरा में सार्वजनिक मंच पर उनकी यह पहली अभिव्यक्ति होगी ,वैस वह नशा विरोधी कार्यक्रमों मे सहभागीरही है और इस क्षेत्र में उन्हे काफी अनुभव है।
हो रहा है, बहुत उदार हो
रहा है। किसी भी शादी-पार्टी में शराब का एक कोना अलग रखा जाता है। नयी बात यह
देखी मैंने महिलाएं-लड़कियां बहुत खुलकर पीने लगी हैं। आगरा दिल्ली से किसी भी
मामले में पीछे नहीं है, मुझे लगता है कि ऐसा आगरा में भी हो
रहा होगा। भारतीय समाज को जितना मैंने समझने की कोशिश की है, उसमें मुझे लगता है कि अगर पुरुष या लड़का पी
रहा है, तो इसे स्वास्थ्य का मसला माना जाता है, पर महिला या लड़की पीने को चरित्र के साथ
जोड़कर देखा जाता है। यह सामाजिक सचाई है। मेरी राय में दोनों के लिए ही यह
स्वास्थ्य या धन का मसला है।
धन का मसला कंपनियों
के लिए, सरकार के लिए
एक बात तो साफ तौर पर सबको समझ लेनी
चाहिए कि सरकार की या कंपनियों की कोई दिलचस्पी शराब को बंद करने में नहीं होगी।
सिगरेट बंद करने में नहीं होगी। इसकी वजह कमाई है। अरबों का टैक्स शराबी लोग
सरकारों को देते हैं, अरबों का मुनाफा शराबी
लोग कंपनियों को करवाते हैं। और मैं बताना चाहूंगा कि शराबियों से
ज्यादा भला टैक्सपेयर और ग्राहक कोई नहीं मिलेगा। कोई भी नहीं। शराब के रेट चाहे
जितने बढ़ा दिये जायें, आपने आजतक कोई भी जुलूस ऐसा ना देखा
होगा, जिसमें शराब के ग्राहक मांग कर रहे हों कि प्लीज शराब
के रेट कम कर दिये जायें, ना। कभी ना देखा होगा, ऐसा जुलूस। जिस भाव में मिले, उस भाव में लेना है। कोई शिकायत नहीं। शराबी
से बेहतर कस्टमर नहीं, कभी पलटकर शिकायत नहीं करता। चुपचाप
लेकर निकल जाता है। आप देखिये, होली या किसी खास मौके पर धूप
में, बारिश में, बिना शिकायत शराबी लाइन में लगकर पूरे धैर्य से संयम से कष्ट झेलकर अपना आइटम
लेता है। कोई शिकायत नहीं। ऐसे पति जो प्याज के महंगे होने की शिकायत तो करते हैं,
पर कभी भी इन्हे शराब की महंगाई पर एक लाइन बोलते नहीं देख पायेंगे।
और मैं तो हैरान रह गया अभी शराबियों की प्रतिबद्धता देखकर। बिहार में नितीश
कुमारजी ने शराबबंदी की घोषणा की। शराब के मामले में परेशानी होती देख एक शराबी ने
एक सभा में नितीशजी पर चप्पल फेंक मारी है। हम देख रहे हैं, हमारी
जनता महंगी अरहर दाल को लेकर परेशान है, पर कभी क्या आपने
सुना कि अरहर से परेशान किसी बंदे ने किसी नेता के सामने इतनी जोरदारी से आवाज
उठायी हो।
