--जस्टि स विष्णू सहाय आयोग की जांच रिपोर्ट में है छह खंड और 775 पृष्ट
रिपोर्ट लखनऊ: मुजफ्फरनगर के अगस्त 2013 में हुए दंगों की जांच के लिए गठित न्यायमूर्ति विष्णु सहाय
मुख्य सचिव आलोक रंजन ने इसके बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया जबकि प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पंडा ने कहा कि रिपोर्ट पहले सदन के पटल पर रखी जाएगी। उसके बाद ही इसके बारे में कुछ कहा जा सकेगा।
राज्य सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगे की जांच के लिए 9 सितंबर 2013 को हाईकोर्ट से अवकाश प्राप्त जस्टिस विष्णु सहाय की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था।आयोग को दो माह में रिपोर्ट देनी थी, लेकिन इस अवधि में जांच पूरी नहीं होने पर कई बार आयोग का कार्यकाल बढ़ाया गया था।वैसे दंगे में हुयी घटनाओं की अलग अलग कयी मजिस्रेे पटी और पुलिस की जांचे हो चुकी हैं जिनके आधार पर जहां एक ओर मुआबजे बंट चुके है ।जबकि बहुत से मामलों में अदालती कार्रवाहियां भी हो चुकी हैं।
27अगस्त 2013 को शुरू हुए इन दंगों में 62 से अधिक की मौत हुयीं थीं। मुजफ्फरनगर के कवाल गांव में शुरू हुई हिंसा बाद में आसपास के कई जिलों में फैल गई थी। बड़े पैमाने पर हुई आगजनी व हिंसा की वजह से एक लाख से अधिक लोग अपने घरों से पलायन कर गए थे और राहत शिविरों में रहेको मजबूर हुए थे।
रिपोर्ट लखनऊ: मुजफ्फरनगर के अगस्त 2013 में हुए दंगों की जांच के लिए गठित न्यायमूर्ति विष्णु सहाय
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| (जस्टिस विष्णू सहाय ने जांच रिपोर्ट राज्यपाल को सोप दी अब वह इसे मुख्यमंत्री को सोंपेंगे) |
आयोग ने बुधवार को अपनी जांच रिपोर्ट राज्यपाल राम नायिक को सौंप दी। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस विष्णु सहाय के द्वारा राजभवन जाकर राज्यपाल को दी गयी रिपोर्ट 775 पृष्टों की है जो कि छैह खंडों में विभक्त हैं। रिपोर्ट के अंतिम 25 पेजों में जांच के निष्कर्ष दिए
गए हैं।
गए हैं।
राज्यपाल राम नाईक का कहना है कि रिपोर्ट पढ़ने के बाद ही वे कुछ कह पाने की स्थितति में होंगे । वे गुरुवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को यह रिपोर्ट भेजेंगे।
उधर जस्टिस सहाय ने राज्यपाल को रिपोर्ट सौंप दिये जाने की पुष्टि् करते हुए कहा है इसके बारे में उनके स्तिर से कुछ भी कहना उपयुक्तं नहीं होगा।मुख्य सचिव आलोक रंजन ने इसके बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया जबकि प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पंडा ने कहा कि रिपोर्ट पहले सदन के पटल पर रखी जाएगी। उसके बाद ही इसके बारे में कुछ कहा जा सकेगा।
राज्य सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगे की जांच के लिए 9 सितंबर 2013 को हाईकोर्ट से अवकाश प्राप्त जस्टिस विष्णु सहाय की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था।आयोग को दो माह में रिपोर्ट देनी थी, लेकिन इस अवधि में जांच पूरी नहीं होने पर कई बार आयोग का कार्यकाल बढ़ाया गया था।वैसे दंगे में हुयी घटनाओं की अलग अलग कयी मजिस्रेे पटी और पुलिस की जांचे हो चुकी हैं जिनके आधार पर जहां एक ओर मुआबजे बंट चुके है ।जबकि बहुत से मामलों में अदालती कार्रवाहियां भी हो चुकी हैं।
27अगस्त 2013 को शुरू हुए इन दंगों में 62 से अधिक की मौत हुयीं थीं। मुजफ्फरनगर के कवाल गांव में शुरू हुई हिंसा बाद में आसपास के कई जिलों में फैल गई थी। बड़े पैमाने पर हुई आगजनी व हिंसा की वजह से एक लाख से अधिक लोग अपने घरों से पलायन कर गए थे और राहत शिविरों में रहेको मजबूर हुए थे।
