28 अगस्त 2015

गीता प्रेस गोरखपुर यथावत चालू कोयी आर्थि‍क संकट नहीं

--न चंदा लेते हैं और नहीं प्रकाशनों के लि‍ये बाहरी वि‍ज्ञापन : खेमका

(बदस्‍तूर सेवारत है  हि‍न्‍दू धार्मि‍क साहि‍त्‍य 
के प्रकाशन और वि‍तरण की सेवा में)
गीता प्रेस गोरखपुर के संचालन में कोई संकट नहीं, न हीं संस्था किसी भी प्रकार का अनुदान स्वीकार नहीं करती।यह कहना है गीता प्रेस ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष और कल्याण पत्रिका के संपादक राधेश्याम खेमका का। सोमवार को बनारस में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वॉट्सऐप और फेसबुक पर कई लोगों के पास गीता प्रेस के नाम पर चंदे की अपील भेजी जा रही है।जो कि‍ एक दम गलत और फर्जी है। प्रेस पर बंदी का संकट दिखाकर धन उगाहीका काम करने की जो कोशि‍शें चल रही है,उनका गीता प्रेस गोरखपुर के प्रबंधन से कोई लेना देना नहीं है।...

  श्री खेमका ने और अधि‍क स्पष्ट करते हुए कहा  कि गीता प्रेस ट्रस्ट कभी भी जनता से किसी तरह का चंदा नहीं लेता है। यहां तक कि, अपनी पवित्र पुस्तकों या पत्रिकाओं में किसी बाहरी संस्था का विज्ञापन भी प्रकाशित नहीं करते।
ट्रस्ट के अध्यक्ष ने कहा कि 1923 में देश के कुछ महापुरुषों द्वारा स्थापित गीता प्रेस का उद्देश्य धर्म प्रचार के लिए जनता में नि:शुल्क साहित्य का वितरण करना है। धर्म साहित्य का मुफ्त वितरण करने में दुरुपयोग की संभावना को देखते हुए इसे कम मूल्य पर बिक्री भी किया जाता है। एक दिन के लिए कुछ कारणों से गीता प्रेस को लॉकआउट करना पड़ा, अगले दिन गीता प्रेस चालू हो गया।