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| उर्दू में प्रिंट हुई प्रति |
उर्दू भाषा में प्रिंट हुई रामचरितमानस की 105 साल पुरानी एक प्रति नई दिल्ली के एक कबाड़ी बाजार से मिली ।रामचरितमानस की यह प्रति 1910 की है। बताया जाता है कि इस पुस्तक को तीन साल पहले दिल्ली के हौजखास में एक कबाड़ी बाजार में फटी हुई किताबों के ढेर से संकट मोचन मंदिर के पुजारी के परिवार द्वारा इसे मात्र 600 रुपये में खरीद लिया गया था।उर्दू में यह पुस्तक भदोही के रहने वाले शिव भरत लाल ने 1904 में लिखी थी । बताया जाता है कि उसके उपरांत इसे लाहौर के हाफ टोन प्रेस ने 1910 में प्रकाशित किया था।
