--आगरा के सूरसरोवर पक्षी बिहार के ईको सेंस्टिव जोनको भी रहेगी राहत
आगरा, एन जी टी के नोटिस और उसके रुख से पशोपेश में पडे आगरा के अनेक
बिल्डरों और इंजीनियरिंग कालेजों के संचालकों के लिये आने वाले दिन राहत भरे
हो सकते हैं ,अगर राज्य सरकार या एनवायरमेंट एक्टविस्ट एन जी टी के
फैसलों के
खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने नहीं जाता है।
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(सूरसरोवर :साल भर बनी रहती है पक्षियों की मौजूदगी ।)--फायलफोटो |
मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अपने एक नवीनतम फैसले में कहा
है कि ओखला पक्षी बिहार के ईको सेंस्टिव जोन का दायरा ब केवल 100मीटर ही होगा।
इस प्रकार एनजीटी ने अक्टूबर 2013 के अपने उस
फैसले को बदल दिया है जिसमें पक्षी विहार के 10 किलोमीटर के दायरे में निर्माण पर रोक लगाने का आदेश दिया गया था। गौरतलब है कि अधिवक्ता गौरव बंसल ने पिछले साल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर करके नोएडा के 50 से अधिक बिल्डिंग परियोजनाओं के निर्माण पर रोक लगाने की मांग की थी.
फैसले को बदल दिया है जिसमें पक्षी विहार के 10 किलोमीटर के दायरे में निर्माण पर रोक लगाने का आदेश दिया गया था। गौरतलब है कि अधिवक्ता गौरव बंसल ने पिछले साल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर करके नोएडा के 50 से अधिक बिल्डिंग परियोजनाओं के निर्माण पर रोक लगाने की मांग की थी.
एन जी टी का फैसला आते ही पर्यावरण एव वन
मंत्रालये ने न्यायाय के आदेश के परिप्रेक्ष्य में बिना किसी विलम्ब के अधिसूचना
जारी कर नेशनल कैपीटल जोन के तहत आने वाले नोएडा, ग्रेटर नोएडा में घर खरीदने वालों को राहत
प्रदान कर दी हैं।
साल 1990 में उच्चतम न्यायलय ने सरकार से ओखला पक्षी विहार के 10 किलोमीटर के दायरे को पर्यावरण की दृष्टि से अतिसंवेदनशील घोषित करने का
आदेश देते हुए इस क्षेत्र में निर्माण पर रोक लगा दी थी. इसके बाद एनजीटी ने
अप्रैल 2015 में सरकार से पक्षी विहार के आसपास के क्षेत्र
को अतिसंवेदनशील घोषित करने का निर्देश दिया था.
उधर यूपी ही नहीं दिल्ली सरकार ने महज 100 मीटर क्षेत्र को अतिसंवेदनशील घोषित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास
भेजा था. लेकिन पर्यावरण मंत्रालय की समिति ने इसे खारिज करते हुए केंद्र सरकार से
ओखला पक्षी विहार के आसपास 1.2 किलोमीटर के दायरे को
पर्यावरण के लिहाज से अतिसंवेदनशील घोषित करने को कहा। जो अब घटकर महज सौ मीटर रह
गयी है।
आगरा
में सूरसरोवर पक्षी बिहार के ईको सेंस्टिव जोन के नाम पर प्रशासन और एनवायरमेंट
एक्टिविस्टों का पिछले कई साल से खेल चल रहस है।ओखला पक्षी बिहार के समान ही
पहले सूरसरोवर पक्षी बिहार के ईको सेंस्टिवजोन को 1.50 कि मी का दायरा चिन्हित
किया गया।जो बाद में मडलायुक्त के स्तर से घटाकर महज 250 मीटर में सिमेट दिया
गया। हालांकि इस दायरे के कारण विवादों
में से काफी में तो अब पक्षाकार के द्वारा
अपना वकील खडा करने जैसी औपचारिक्ता की भी जरूरत नही रह गयी है।
