28 अप्रैल 2015

भूकंप के झटकों से हाई राइज बि‍ल्डिगों के धधे पर पहुंची चोट

--गुणगांव और ग्रेटर नोयडा में सबसे ज्‍यादा प्रति‍कूल असर

--एन सी आर के भूकंप प्रभावि‍त क्षेत्रों का पुन: हो सकता है वर्गीकरण

(एन सी आर में बन रही माल्‍टी स्‍टोरी बि‍ल्‍डि‍गं)
आगरा,हाई राइज्‍ड बि‍ल्‍डि‍ग खडी करने का शुरू हुआ सि‍लि‍सला कुछ दि‍नों के लि‍ये थम सकता है,एन सी आर में आये भूकंप के झटकों का असर केवल दि‍ल्‍ली और आसपास के क्षेत्र में ही नहीं पडा है।राइसीना हि‍ल जि‍सके ऊपर राष्‍ट्रपति‍ भवन खडा है से चारों ओर का 200 कि‍ मी का क्षेत्र भकंप का असर हो सकने वाले क्षेत्रों
में माना जा रहा है।ताजा भूकंप के झटाकों को लेकर एक बार पुन: कयी क्षेत्रों की श्रेणी का पुनर्मूल्‍यांकन कि‍या जा सकता है।भू वैज्ञानि‍क जहां इसकी कडी वकालत कर रहे हैं।वहीं आर्कीटेक्‍ट और रीयल स्‍टेट के धंधे में लगे लोग इसके वि‍रुद्ध हैं।सबसे ज्‍यादा मुश्‍कि‍ल गुणगांव और ग्रेटर नोयडा क्षेत्र में है।इन दोनों ही स्‍थानों पर तो रि‍यल एस्‍टेट के धंधे की बुनि‍याद ही हाई राइज बि‍ल्‍डिगों पर ही टि‍की है। आगरा में ही मल्‍टी स्‍टोरी इमारतों को अपने रहने के लि‍ये खरीदने वाले और नि‍वेशक भूकंप के झटकों के बाद से एक दम खामोश हो गयो हैं। जबकि‍ भवन नि‍ र्माता चाहते हैं कि‍ मौजूदा दौर जल्‍छी से टले और एक दम अनि‍श्‍चि‍त्ता का बना भाव ठंडा पडजाये।
 सूत्रों से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार आगरा और मथुरा जनपदो में तीन मंजि‍ला इमारतों तक ही फि‍लहाल लोगों में दि‍लचस्‍पी रहा गयी है।जहां भवन खरीद फरोक्‍त के काम पर प्रत्‍यक्ष असर पडा है वहीं नये नि‍र्माण का काम एक दम ठप सा हो जाने के फलस्‍वरूप भवन नि‍र्माण श्रमि‍कों की मांग काफी घट गयी है।यही नहीं बि‍ल्‍डि‍ंग मैटीरि‍यल की मांग में भी कमी आयी है।
भूकंप रोधी भवन बनाये जाने की बाते तो सरकार और नि‍वेशक लम्‍बे समय से करते आ रहे हैं कि‍न्‍तु उसको अपनाये जाने की स्‍थि‍ति‍ ज्‍यादा साफ नहीं है।अब तक केवल एक ही तथ्‍य सामने आया है कि‍  पि‍लरों पर खडी इमारत तभी भूकंप क झटके झेल सकती है जबकि‍ उसके आर असी सी पि‍लर आपस में भी मजबूत कालम डाल कर जुडे हों।कि