--1857 में निकला था स्वास्थ्य सेवा
सहायकों का पहला बैच
--18 मैडीकल आफीसरों सहित बढेंगे 600स्टाफ सदस्य
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आगरा,1854 में ईस्ट इंडिया कंपनी के
द्वारा अपनी सेना के अफसरों और सैनिकों की सस्थ्य सुरक्षा सेवा लिये प्रशिक्षित
स्टाफ उपलब्ध करवाने को स्थापित थमसन मैडीकल स्कूल 160 साल का हो...
गया है। वर्तमान में एस एन मैडीकल कालेज के रूप में विख्यात है और उत्तर प्रदेश का सबसे बडे परिसर वाला संस्थान है। सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों के चल रहे दौर से कही पूर्व इसे देश के मानक स्वास्थ संस्थान का स्थान प्राप्त रहा है। पिछले तीन दशकों से घोर उपेक्षा के दौर के बाद एक बार फिर से अपने पुराने गौरव को हांसिल करने की दिशा में 'सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल'' बनने की ओर अग्रसर हो चुका है।
गया है। वर्तमान में एस एन मैडीकल कालेज के रूप में विख्यात है और उत्तर प्रदेश का सबसे बडे परिसर वाला संस्थान है। सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों के चल रहे दौर से कही पूर्व इसे देश के मानक स्वास्थ संस्थान का स्थान प्राप्त रहा है। पिछले तीन दशकों से घोर उपेक्षा के दौर के बाद एक बार फिर से अपने पुराने गौरव को हांसिल करने की दिशा में 'सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल'' बनने की ओर अग्रसर हो चुका है।
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| (केन्द्रीय मंत्री डा हर्ष वर्धन) |
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा हर्ष वर्धन ने कालेज और अस्पताल की सेवाओं के
उच्चीकरण व विस्तार के लिये दौ सौ करोड
की राशि दिये जाने की घोषणा की है। 'प्रधानमंत्री स्वास्थ्य
सुरक्षा योजना' के तहत यह राशि मिलेगी ।राज्य और केन्द्र की इमें 80:20की
भागीदारी होगी।इ प्रकार केन्द्र सरकार 160 करोड की राशि देगी जब कि राज्य
सरकार को 40 करोड का निवेश करना होगा।नयी योजना के क्रियान्वयन के लिये अस्पताल
में 18मैडीकल आफीसर,24 सीनिर रैजीडेट डाक्टर ,35पैरामैडभ्कल स्टाफ तथा
200चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों को भर्ती करना होगा।
देश के पहले तीन मैडीकल
स्कूलों में से एक
, यह कॉलेज थामसन
मैडीकल स्कूल के रूप में सेना की चिकित्सा जरूरतों को पूरा ने के लिये प्रशिक्षण
देने को 1854 में शुरू किया गाया था।यह देश के पहले तीन मैडीकल स्कूलों में से
था।दश्कों तक कॉलेज का विकास और शैक्षणिक क्षेत्र की उपलब्धियां यूनाइटिड प्रोविस
आफ आगरा एंड अवध की उपलब्धियों का अपने
आप में पर्याय रहीं। थमसन मैडीकल स्कूल पर आने वाले खर्च को उठाये जाने का काम ईट
इंडिया कंपनी को ही करना था।तभी परिसर में संचालित एक अस्पताल को इससे सम्बद्ध
कर दिया गया।जो कि डाक्टरी की शिक्षा को मरीज उपलब्ध करवाये जाने के लिये
जरूरी भी था।तभी से इसे थाम्पन मैडीकल स्कल के स्थान पर थाम्पसन होस्पिटल के
नाम से जाना जाने लगा।इस संस्थान पहला बैच 1857 में पास आऊट हुआ उस समय भारत में
स्तंत्रता संग्राम की पहली लडाई लडी जा रही थी।बडे पैमाने पर हिसा हो रही थी और
स्वास्थ्य चिकित्सा की व्यापक जरूरत थी।कॉलेज के इतिहास में वर्ष 1939 का
खास महत्व है, जब कि इसे पूर्ण डिग्री कालेज का दर्जा देकर आगरा विश्वविद्यालय
से सम्बद्ध किया गया था।वर्तमान में इ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो( डा )अजय
अग्रवाल है।ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा कभी शुरू किये गये इस कॉलेज की कुछ
महत्वपूर्ण घटना जब कि कालेज के प्राचार्य ने सैल्यूलर जेल में कैदियों के
जीवन यापनस्तर की जांच को गठित कमेटी के सदस्य के रूप में ब्रटिश सरकार की
इंच्छा के विपरीत जेल की व्यवस्थाओं को अमानवीय बताकर बन्द करने के पक्ष में
राय दी। वहीं डा वीना मिश्रा का इका प्राचार्य बनना दूसरी घटना था, जो कि स्वातंत्रा
सेनानी मां पिता की संतान थीं।
डा जोह्न मूरे थे पहले प्रंसिपल
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| (डा जोह्न मूरे थे पहले प्रंसिपल) |
डा जोह्न मूरे स्क्वाटिश
थे ,उनका जन्म एबरडेन शायर में 1809 में हुआ था और 1898,में 89 साल की उम्र में शानदार जिदगी काट कर दुनियां को अलविदा कहा।वह एक अच्छे
शिक्षक और सर्जन के साथ ही अपने समय के जानेमाने फोटो ग्राफर थे।लकडी के ढाचे
वाले कैमारे में 16 से 20इंच तक के मोमियां कागज(वक्स पेपर) पर निगेटिव पर
फोटो उतारने का उनके द्वारा खोज की गयी।पूर्व में केवल शीशे के नैगेटिव प्लेट का उपयोग ही अधिक
प्रचलित था। इस खोज से घुम्मकड फोटो ग्राफरों को काफी सुविधा हो गयी।अपने कार्यस्थल
थाम्पसन स्कूल परिसर सहित उन्होंने
आगरा और आसपास के उस समय तक के सभी प्रचलित स्मारकों के फोटो उनके द्वाराखींचे
गये। इनमें से अधिकांश अब भी इंग्लिश आफिस लाइब्रेरी में संकलित है।चलीस साल
तक भारत में वह ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना के डाक्टर सहित विभिन्न दायित्वों
को संभालते रहे। वैसे उनका थामसन मैडीकल कॉलेज के प्रसिपल के रूप में ही 1854 से
58 का कार्यकाल सबसे अधिक महत्वपूर्ण रहा।
रुडकी का आई आई टी भी
है थामसन की ही देन
अस्पताल और मैडीकल
कालेज को आगरा में खुलवाने की मूल योजना ईस्ट इंडिया कंपनी के ब्यूरोक्रट और शिक्षा
प्रसार के प्रबल पक्षधर माने जाने वाले जेम्स थामसन की थी।1843 से 1853 तक वह
नार्थ वेस्टर्न
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| (लै गर्वनर जेम्स थामसन) |
प्रोविस आगरा एंड अबध के लैफ्टीनेट गर्वनर थे। प्रांत के 897 गांवों में आरंभिक शाक्षा के स्कूल
खुलवाये जहां कि जरा सा भी स्थानीय समर्थन मिलपना संभव था।हिन्दुस्तानी भाषा
खास कर उर्दु के प्रति इसके सम्मान का आंकलन इसी से किया जा सकता है कि मिर्जा गालिब को आमदनी का सम्मानजनक
अवसर प्रदान करने के लिये दिल्ली के विद्यालय में उर्दू का शिक्षक नियुक्त
करने का प्रयास किया हालांकि यह बात अलग है कि गालिब को उनके द्वारा नौकरी
देने प्रस्तावके बाद के व्यवहार का अंदाज पंसद नहीं आया है और उन्होंने नैकरी
करने की जगह फाकामस्ती को सुकून के लिये ज्यादा उम्दा माना।
थामसन के द्वारा आगरा में मैडीकल स्कूल शूरू करवाने के समान ही अन्य महत्वपूर्ण काम रुडकी
में 1847 में इंजीनियरिंग कालेज शुरू करवा के किया ।इसका मुख्य मकसद तो 1842
में बनना शुरू हो चुकी गंगा केनाल के लिये इंजीनिरिंग टाफ को की उपलब्ध कराना
क्था। थामन की मौत के बाद इस कालेज का नाम उन्हीं के नाम पर थामसन सिविल इंजीनियरिग
कालेज रख दिया गया।यह देश का पहला तकनीकि और प्राविधिक शिखण संस्थान था।1949
में वातंत्र भारत की पहली टैक्नीकल यूनीवर्टी बना और रुडकी यूनिवर्टी इसका नाम
कर दिया गया। 2001 में तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री मुरली मनोहर जोशी के द्वारा
प्रयास करके इसे भारत सरकार के द्वारा आई आई टी का दर्जा दे दिया। इसी अवसर पर
यूनीवसर्टी के बोर्ड आफ गवर्नर के द्वारा फैसला करके विश्वविद्यालय के मुख्
भवन का नाम संस्थान के संस्थापक के प्रति कृतिज्ञता व्यक्त करने के लिये
जेम् थामसन बिल्डिंग रख दिया गया।इसी तर्ज पर रुडकी की नगर पालिका ने भी
यूनीवर्स्टी के सामने की रोड का नाम जेम्स थामसन
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| (आई आई टी रुडकी का थामसन ब्लाक,एस एन अस्पताल के सामान ही रुडकी के इंजीनियरिंग कालेज को भी थामसन ने ही खुलवाया था।) |
रोड कर दिया।21 वीं दी में यह
पहला मामला है जब कि जबकि ईस्ट इंडिया कंपनी के किसी लैफ.टीनेंट गर्वनर के
नाम पर किसी स्थान ,सडका या बिल्डिंग का नाम फिर से रखा गया हो।(http://www.iitr.ac.in/Main/news/Notification(12122013).pdf)
वहीं थामसन मैडीकल स्कूल ,थामसन मैडभ्कल कालेज के बाद उ प्र की
पहली महिला गवर्नर,प्रख्यात गांधी वादी
श्रीमती सरोजनी नायडू के नाम पर रख दिया गया और आज
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| डा सरोजनी नायडू |
यह एस एन अस्पताल के
रूप में आम जनता के बीच अपनी खास पहचान रखता है।
निराशा के बाद बैहतर
सेवा के दौर को लेकर नई उम्मीदें
यह बात अलग है कि आगरा
का आम नागरिक इसकी सेवाओं से संतुष्ट नहीं है।किन्तु उम्मीद है कि केन्द्र
सरकार की ओर से स्वास्थ्य मंत्री डा
हर्ष बर्धन की घोषणा से सुपर स्पेशलिटी अपताल बनाये जाने को लक्ष्य प्राप्त
करने के बाद 'सभी के लिये समस्त रोगों
का इलाज ‘ यहां भी संभव होने लगे।





