May 18, 2018

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे बना जल्दी ऊपर पहुँचाने वाला एक्सप्रेसवे

आगरा। 23 दिसम्बर 2016 को आगरा को प्रदेश की राजधानी लखनऊ से जोड़ने वाला 302 किमी0 लम्बा एक्सप्रेसवे शुरू हुआ, जिस पर दि0 19.1.2018 की मध्यरात्रि से टोल लगना प्रारंभ हो गया, लेकिन अभी तक इस एक्सप्रेसवे पर बेतहाशा तेज गति से दौड़ने वाले वाहनों को रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं हुई है, जिसका
परिणाम यह है कि अगस्त-2017 से मार्च-2018 तक 853 हादसों में 100 लोगों की मृत्यु इस एक्सप्रेसवे पर हो चुकी है। सूचना अधिकार में यह खुलासा आगरा डवलपमेन्ट फाउण्डेशनके सचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता के0सी0 जैन को अभी हाल में उपलब्ध कराई गई सूचना से हुआ। आश्चर्यजनक रूप से एक्सप्रेसवे पर पार्किंग व पेट्रोल पम्प की सुविधा भी अभी तक प्रारंभ नहीं हुई है।उ०प्र० एक्सपे्रसवेज इन्डस्ट्रियल डेवलपमेन्ट अथाॅरिटी (यूपीडा) ने उपलब्ध कराई सूचना में यह बताया कि हल्के वाहनों हेतु एक्सप्रेसवे पर गतिसीमा 100 किमी प्रति घंटा व भारी वाहनों हेतु गतिसीमा 80 किमी प्रति घंटा है, जिस पर
गति उल्लंघन को रोकने एवं ट्रैफिक की सुरक्षा के लिए ‘एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेन्ट सिस्टम’ के अंतर्गत 10 कैमरे लगाये जाने हैं, जिनको लगाने के लिए निविदा प्रक्रिया यूपीडा द्वारा प्रारंभ की जा चुकी है। उपलब्ध कराये गये आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-2018 में 7 लाख से ज्यादा वाहन एक्सप्रेसवे से गुजरे, जिनसे 14 करोड़ से अधिक की राशि टोल टैक्स के रूप में प्राप्त हुई।
अधिवक्ता के0सी0 जैन द्वारा पार्किंग, पेट्रोल पम्प, ट्राॅमा सेन्टर व गतिनियंत्रण हेतु कैमरों को लगाये बिना करोड़ों रुपया प्रतिमाह टोल के रूप में वसूले जाने के औचित्य पर प्रश्न उठाया। सच यह है कि गतिनियंत्रण व सुविधाओं के अभाव में हादसे हो रहे हैं जबकि एक्सप्रेसवे का उद्देश्य वाहनों का तेज गति से चलना नहीं, अपितु सुरक्षित यातायात है और आवश्यक सुविधाओं की कमी के कारण विगत् 9 माहों में 853 हादसों में 100 व्यक्तियों ने अपनी जान गंवा दी। ट्राॅमा सेन्टर व चिकित्सकीय सुविधाओं की कमी ने भी इस एक्सप्रेसवे को असुरक्षित बना रखा है।

एडीएफ की ओर से यह भी प्रश्न उठाया गया है कि 302 किमी लम्बे एक्सप्रेसवे पर प्रत्येक दिशा में केवल दो-दो स्थानों पर वे-साइड एमेनिटीज़ होना कम है, जबकि 165 किमी लम्बे यमुना एक्सप्रेसवे पर प्रत्येक दिशा में तीन-तीन स्थानों पर ऐसी सुविधायें हैं। लखनऊ एक्सप्रेसवे पर ये सुविधायें प्रत्येक दिशा में पाँच-पाँच स्थानों पर होनी चाहिए।यह भी मांग की गई कि गतिनियंत्रण के लिए भी जल्दी से जल्दी कैमरे लगाये जाने चाहिए और गति उल्लंघन करने वाले वाहनों का चालान होना चाहिए।