12 मार्च 2016

अँग्रेज़ी कवि रूदियार्ड किपलिंग की १५० वीं जयंती मनाई

-जंगल बुक को याद कर व्क्ताओं ने उनकेसाहित्‍य में  योगदान को याद किया 
(जंगल बुक की मूल पहली  प्रति और लेखक रूदयार्ड किपलिंग)
 आगरा ,जंगल जंगल शोर मचा है, चडढी पहन कर फूल खिला है , जैसी कल्‍पना को प्रिट और स्‍क्रीन माध्‍यमों ने आम जनता में लोकप्रिय बनाया उसके मूल सर्जक रूदयार्ड किपलिंग  को आगरा के लिट्रेरी सर्किल के  प्रमुख संगठन इंग्लीश लिटररी  सोसाइटी ऑफ आगरा (एल्सा)
 द्वारा याद किया गया। मौका था किपलिंग की१५० वीं साल गिरह पर यूथ हॉस्टिल हॉल में  आयोजित कार्यक्रम का। मुख्‍य वक्‍ता के रूप में बोलते हुए हेड ऑफ थे डिपार्टमेंट इंग्लीश आगरा कॉलेज अपने उडबोधन में डा एन के घोष ने कहा की अँग्रेज़ी कवि रूदयार्ड किपलिंग का जन्म १८६५ में मुंबई में हुआ था,१९०७ में उनको नोबेल पुरूस्कर से सम्मानित किया गया. जंगल बुक में मोगली के चरित्रा ने उनकी लोकप्रियता मेंचार चाँद लगाए.घोष ने कहा की किपलिंग को सही तरीके से समझा नहीं गया है .बेशक उनके राजनैतिक विचारों से मतभेद हो सकतेहैं।
अन्‍य प्रमुख वक्ता थे डा आर एस तिवारी शिखेरेश,  आर बी एस कॉलेज. के डा संजय मिश्रा आदि विषय विद्वान। संगोष्‍ठी का संचालन ब्रज खंडेलवाल ने किया जबकि उपस्थितों में शिवे प्रताप सिंग, अजय सिंग रात्ोड़, अजय शर्मा, अमित कर्दम, पद्‍मिनी अय्यर, कॉमिला सुनेजधर,वेद पल धार , अमीन उस्मानी, मनोज श्याम, ललित मोहन शर्मा, श्रवण कुमार सिंग, अंकित सिंग, तथा अनेक अँग्रेज़ीभाषा के स्टूडेंट्स. शामिल थे