22 जनवरी 2016

बगदाद में चिश्‍ती साबरी के सज्‍जादानशीं ने आतंकवाद के खात्‍में को मांगी दुआ

-- हजरत मुहीउद्दीन शाह गौसुल आजम पीर के दरबार में आगरा से लेजायी गयी चादर शरीफ पेश

आगरा: दरगाह हजरत ख्‍वाजा शेख सैय्यद फतिहउद्दीन बल्‍ख्‍यी अलमारुफ तारा शाह चिश्‍ती साबरी के
(हजरत मुहिउद्दीन गौसुलआजमपीर बगदाद के
दरबारमें चिश्‍ती साबरी आगरा के सज्‍जादानशीं
 रमजानअलीयााह: फोटो- असलम सलीमी)
सज्‍जादानशीं आले पंजतनी कुतुब-ए-मुहबबत पीर अलहाज रमजान अली शाह चिश्‍ती साबरी ने शुक्रवार 22 नवम्‍बर को बगदाद शरीफ  से रोजा-ए –मुबारक हजरत मुहीउद्दीन शाह गौसुल आजम पीर के उर्स –ए –मुबारक के मौके पर मरकज साबरी से लेजायी गयी चादर शरीफ दरबार में पेश की।
 उन्‍होंने उर्स-ए-गोसुल आजम के मुबारक मौके पर हिन्‍दुस्‍तान की फलाह बैहूद तरक्‍की और आतंकवाद के खात्‍मे की खास दुआ बारगाह में की गयी । चादर शरीफ चढाने जाते हुए पीर अलहाज रमजान अली शाह,हाजी कासिम अली शाह,हाजी  इस्‍लाम कादरी आदि चादर के मौके पर मौजूद थे
 गौसुल आजम की बारगाह में उर्स के मौके पर
दुनियां के कोने कोने से जायरीन हाजरी देने पहुंचे हुए हैं। मान्‍यता है कि इस अवसर पर हर मांगने वालों की दुआ मांगने वालों की झोलीभर जातीहै। जब आगरा से गये श्रद्धालु पहुंचे तो उस वक्‍त चादर शरीफ पेश करने वालों की लाइन लगी हुई थी।इन्‍हीं की मौजूदगी के बीच आगरा से लेजायी गयी चादर शरीफ पेश की गयी ।इसी मौके पर पाकिस्‍तान के कॉलेज में हुए आतंकवादी हमले में मारे गये बच्‍चों की मग्‍फिरत की दुआ भी की गयी और उनके परिवार के लोगों की सब्र को भी दुआ के लिये हाथ उठाये गये। इस हमले की निंदा करते हुए पीर साहब (पीर अलहाज रमजान अली शाह चिश्‍ती साबरी)ने कहा कि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता । इस्‍लाम में इस प्रकार के हमलों को यजीदियों का हमला करार दिया गया है।यानि इस्‍लाम के नियमोंके खिलाु काम करने वाले यजीद के गिरोह के हैं।
हैं।इस मौके पर उन्‍हों ने शेर पढते हुए कहा कि
         सिम्रोयजीद कल भी थे इस दौर में भी है

           कल भी थी आज भी है जरूरत हुसैन की