अभी बहुत सा
लिट्रेचर रह गया है प्रकाशन से
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| करुणेषजी की स्मृति को याद करते हू अशोकजैन सी ए,दाहिनी ओर रानी सरोज गौरिहार ने द्वीप जला कर किया उदघाटन |
(कुमार ललित)
आगरा : पुस्तकें छापवाने और प्रकाशित करने का सिलिसला बीत रहे वर्ष यानि 2015 में लगातार चला। किन्तु कोर्सों की किताबों के अलावा शायद ही कोई किताब ऐसी हो जिसका दूसरा संस्करण छपने की स्थिति बन सकी हो। यह सु-संयोग बना प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी स्व रोशन लाल करुणेश की किताब ‘उर्मिला’ को लेकर। जब इसे नये कलेवर के साथ उनके स्वजनों ने जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में प्रकाशित कर डाला। बेलनगंज(अपने समय का आगरा का प्रमुख व्यापारिक केन्द्र) में हुए जिस धमाके की धमक से लंदन
तक दहशत फैला देने वाले कांड के पुरोधा निहायत जज्बाती थे ,वे उस टोली के सदस्य थे जो कि बम पटाकों सहित किसी भी तरीके से अंग्रेजों को देश से बाहर तो जरूर करना चाहती थी किन्तु किसी की भी हिंसा करना उनका धर्म नहीं था। जिस प्रकार से शहीदभगत सिह ने पार्लिया मेंट में बम धमका करने के बावजूद किसी की भी जानलेना मुनासिब नहीं माना था ठीक वैसे ही करुणेश जी के मित्रों ने केवल धमाके से ही काम चलाना चाह।बाद में तो स्व करुणेश पक्केे गांधीवादी सत्यागृही ही हो गयो थे।
आगरा : पुस्तकें छापवाने और प्रकाशित करने का सिलिसला बीत रहे वर्ष यानि 2015 में लगातार चला। किन्तु कोर्सों की किताबों के अलावा शायद ही कोई किताब ऐसी हो जिसका दूसरा संस्करण छपने की स्थिति बन सकी हो। यह सु-संयोग बना प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी स्व रोशन लाल करुणेश की किताब ‘उर्मिला’ को लेकर। जब इसे नये कलेवर के साथ उनके स्वजनों ने जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में प्रकाशित कर डाला। बेलनगंज(अपने समय का आगरा का प्रमुख व्यापारिक केन्द्र) में हुए जिस धमाके की धमक से लंदन
तक दहशत फैला देने वाले कांड के पुरोधा निहायत जज्बाती थे ,वे उस टोली के सदस्य थे जो कि बम पटाकों सहित किसी भी तरीके से अंग्रेजों को देश से बाहर तो जरूर करना चाहती थी किन्तु किसी की भी हिंसा करना उनका धर्म नहीं था। जिस प्रकार से शहीदभगत सिह ने पार्लिया मेंट में बम धमका करने के बावजूद किसी की भी जानलेना मुनासिब नहीं माना था ठीक वैसे ही करुणेश जी के मित्रों ने केवल धमाके से ही काम चलाना चाह।बाद में तो स्व करुणेश पक्केे गांधीवादी सत्यागृही ही हो गयो थे।
स्व
करुणेश जी का जन्म श्ती समारोह गांड होटल में आयोजित हुआ ,स्वतंत्रता सेनानी
रानी सरोज गौरिहार, ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की जबकि दैनिक जागरण के समाचार संपादक आनंद शर्मा, समाज सेवी अशोक जैन,वरिष्ठ अधिवक्ता अचल कुमार
शर्मा,विख्यात कवियत्री डा शशि तिवारी,वरिष्ठ साहित्यकार डा राजेन्द्र मिलन, आगरा विश्वविद्यालय
के पूर्व कुल सचिव डा राम अवतार शर्मा, मन्कामेश्वर मन्दिर
के महंत योगेश पुरी, राजेन्द्र कुमार गुप्ता, श्रीमती राम लता गुप्ता, स्वदेश ग्रोवर, आदि कार्यक्रम में शामिल होने वालों में मुख्य थे। सामारोह में मून चैनल
के द्वारा बनाई गयी डौक्यूमेट्री ‘नमन’को भी प्रदर्शित किया गया।
श्री
करुणेश के पुत्र एवं पत्रकार श्री आदर्श ननछन के अनुसार पिताजी अत्यंत स्वाध्यायी
एवं संवेदनशील व्यक्ति थे। रामायण के
मुख्य पात्रों में से एक लक्ष्मणजी की पत्नी ‘उर्मिला’ पर
आधारित इस पुस्तक का पहला संस्करण समाप्त हए कई वर्ष हो गये जबकि उसकी मांग
लगातार बनी रही है।इसी लिये इसे दुबारा प्रकाशित किया है। वह बताते हैं कि स्व
करुणेष जी के बहुत से साहित्य के पुर्नप्रकाशन की जरूरत समय समय पर महसूस की गयी
वहीं काफी साहित्य 