July 5, 2020

'आगरा गार्मेंट हब ' का क्रि‍यान्‍वयन सस्‍ती जमीन की उपलब्‍धता से ही संभव

-- बारह घंटे की 'वर्कर शि‍फ्ट' की व्‍यवस्‍था भी गार्मेट यूनि‍टों की जरूरत 
गार्मेंट हव वेवीनॉर: जमीन मि‍ले तब तेजी से बढ जायेगी योजना।

आगरा: ध्‍वस्‍त प्राय स्‍थति‍ में पहुंच चुकी ताज सि‍टी की अर्थव्‍यवस्‍था को  पुन: पटरी पर लाये जाने के लि‍ये कि‍ये जा रहे प्रयासों में गारमेंट इंडस्‍ट्री का बहुत ही महत्‍वपूर्ण योगदान दे सकती है, बशर्त इस क्षेत्र में नि‍वेश करने में दि‍लचस्‍पी रखने वालों के द्वारा अपेक्षि‍त आधारभूत जरूरतों को पूरा करने में आगे आये। यह मानना था नेशनल चैम्बर ऑफ कॉमर्स, आगरा डवलपमेन्ट फाउन्डेशन (ए0डी0एफ0) एवं आगरा विजन 2025 द्वारा संयुक्‍त रूप से रवि‍वार को आयोजि‍त 'वेबिनार' मे बोलने वाले की स्‍पीकरों सहि‍त 70 से अधि‍क  सहभागि‍यों का। गारमेन्ट एक्सपर्टस व स्थानीय उद्यमी इस बात पर सहमत थे कि‍ आगरा ' गारमेंट हब' के लि‍ये 
सर्वथा उपयुक्‍त है।
उद्यमि‍यों और भावी निवेशकों  का कहना था कि‍ सस्ती औद्योगिक भूमि इस इण्डस्ट्री के लिये बहुत जरूरी है।जमीन की उपलब्‍धता सुलभ हो जाते ही तमाम समस्‍यों उद्यमि‍ अपने स्‍तर से भी हल कर लेगे। वक्‍ताओं ने कहा कि‍ जमीन की कीमतो की महत्‍ता को इसी से आंका जा सकता है कि‍  'भूमि‍ मूल्‍यों में अन्‍तर के कारण ही गारमेन्ट इण्डस्ट्री की काफी यूनि‍टें दिल्ली और  नोएडा से मानेसर और मानसेर से दिल्ली जयपुर रोड के नव वि‍कसि‍त इंडस्‍ट्रि‍यल क्‍लस्‍टरों में शि‍फ्ट हो गयी।सस्‍ती तथा औपचारि‍क अनुमति‍यों वाली जमीन की उपलब्‍धता गार्मेट इंडस्‍ट्री के पनपने में सबसे अहम है। 
 -- ढाचागत सुवि‍धायें अहम
श्री अरविन्द गुप्ता ने इस इंडस्‍ट्री के रहे अपने  50 साल से अधिक एक्सपर्ट के एक एक्‍सपोर्टर के श्रूप मे रहे अनुभवों के आधार पर बताया कि‍  वर्तमान में देश में लगभग एक लाख गारमेन्ट बनाने वाली इकाईयां हैं जिसमें ऑर्गनाइज  सैक्टर की केवल 15-20 प्रतिशत ही हैं जबकि‍ शेष छोटी इकाईयां हैं। गारमेन्ट हब के लिये साफ सुथरे टाइटल वाली भूमि रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर, गुणवत्ता पूर्ण पानी, बिजली, केपिटल इंसेटिव, ट्रेनिंग सेन्टर, फायर सर्विस, स्वास्थ्य केन्द्र आदि की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही 12 घंटे की शिफ्ट में वर्कर को कार्य करने की अनुमति होनी चाहिये। 
अहमदाबाद के गारमेन्ट एक्सपर्ट सुकेतु शाह ने कहा कि गारमेन्ट हब के लिये इंसेटिव की जरूरत है। वहां श्रमिकों के रहने के लिये होस्टल होना चाहिये। गारमेन्ट उद्योग में हमारा देश अभी बहुत पीछे है और उसकी प्रगति की बहुत संभावनाऐं हैं।आगरा ग्रामीण विधायक हेमलता दिवाकर ने गारमेन्ट हब के लिये अपना पूरा समर्थन देने की बात रखी।
-- 205 प्रस्‍ताव आये
संभावना चि‍न्‍हांकि‍त :अब बात बढे आगे।
चैम्बर अध्यक्ष राजीव अग्रवाल एवं विधिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष के0सी0 जैन द्वारा बताया गया कि 4-5 दिन की अवधि में 205 उद्यमी नये उद्योग की स्थापना के लिये आगे आये हैं।जो कि‍ अपने आप में एक बडी संख्‍या है और प्रयासों को अनवरत जारी रखने का सबल कारण है।   
निफ्ट के एसोसिएट प्रोफेसर नौशाद खान द्वारा गारमेन्ट सिलाई की बारीकियों को समझाते हुए बताया गया सस्ती औद्योगिक भूमि इण्डस्ट्री के लिये बहुत जरूरी है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवा नि‍वृत्‍त  न्यायमूर्ति राजीव लोचन मेहरोत्रा ने गारमेन्ट हब के माध्यम से रोजगार बढ़ाने के लिये एकजुटता की बात रखी। 
--महि‍लाओं को बढेगी  रोजगार  संभावना 
उद्यमी साबिया खान के प्रश्न पर कि गारमेन्ट उद्योग के लिये श्रमिक आगरा में क्यों नहीं उपलब्ध हैं तो उसका उत्तर यह निकल कर आया कि यहां पर कम उद्योग हैं। गारमेन्ट इण्डस्ट्री में 25 साल का अनुभव रखने वाले श्री अनिल शर्मा ने कहा कि हमें  अध्ययन कराना चाहिये ताकि हम अपनी योजना उसी के अनुसार बना सकें। महिलाओं में सीखने की क्षमता अधिक होती है और हम उन्हें जल्दी प्रशिक्षित करके रोजगार दे सकते हैं। बांग्लादेश में उपलब्ध सुविधाओं का भी उन्होंने विस्तार से वर्णन किया। 
कंसैप्‍ट डौक्‍यूमेंट शासन को भेजा जाये
ए0डी0एफ0 के अध्यक्ष पूरन डाबर द्वारा पहल का समर्थन किया गया और गारमेन्ट हब की अवधारणां टिप्पणीं बनाकर शासन से स्वीकृति कराने की बात कही। सी0ए0 प्रमोद चैहान द्वारा दक्षिणी बाईपास के निकट भी गारमेन्ट हब के लिये भूमि की सम्भावनाओं को तलाशने की बात कही गयी। 
शारदा यूनिवर्सिटी के बाई0के0गुप्ता ने लुधियाना और त्रिपुर की सफलता के कारण जानने चाहे जिसको विशेषज्ञों ने बताया कि किस प्रकार समय के साथ वह बड़े हब बन गये। रेडीमेड गारमेन्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आर0के0नय्यर द्वारा उत्तर प्रदेश शासन के माध्यम से दी जाने वाली सुविधाओं का हवाला दिया गया। गारमेन्ट एसोसिएशन के संजीव अग्रवाल द्वारा भी स्थानीय उद्यमियों को आगे बढ़ाने की बात रखी गयी। चैमबर के पूर्व अध्यक्ष राजीव तिवारी द्वारा भी इस पहल का समर्थन किया गया।
टी0टी0 जैड के सदस्य पर्यावरणविद् इंजी0 उमेश शर्मा द्वारा कहा गया कि गारमेन्ट मैन्युफेक्चरिंग उद्योग में कोई पर्यावरणीय रूकावट नहीं है और वह व्हाईट कैटेगरी में है। एक्‍सपोर्टर रजत अस्थाना व शिशिर अस्थाना (स्टोनमेन) द्वारा भी उद्योग हब बनाये जाने के लिये दक्षिणी बाईपास के नजदीक की भूमि और कॉमन एफ्लूएन्ट प्लान्ट लगाने की बात कही गयी।   
वेबिनार में धन्यवाद ज्ञापन राजीव अग्रवाल द्वारा किया गया। 
ये  थे वेवनार के  भागीदरों 
वेवि‍नार के भागीदारों में उपाध्यक्ष राजेंद्र गर्ग, उपाध्यक्ष योगेश जिंदल, कोषाध्यक्ष मयंक मित्तल, विधि प्रकोष्ठ के चेयरमैन केसी जैन, पूर्व अध्यक्ष अमर मित्तल, राजीव गुप्ता, राजीव तिवारी, पूरन डावर, टेक्सटाइल इंडस्ट्री विशेषज्ञ अरविंद गुप्ता, नौशाद खान, सुकेतु शाह, अनिल शर्मा, उमेश चंद शर्मा, अनिल अग्रवाल, अनुराग शर्मा, सर्बिया खान, अर्चिता दत्ता, दिनेश बंसल, दिवाकर पंजवानी, हेमंत लोहिया, किशोर खन्ना, मनीष गर्ग, मुकेश गोयल, नरोत्तम शर्मा, प्रमोद चैहान, प्रतीक, प्रवीण कुमार, मनीष अग्रवाल रावी इवेंट्स, रेडीमेड गारमेंट एसोसिएशन के आरके नैयर, संजय जुत्शी,  शिशिर अस्थाना, सुशील बंसल, विधि अग्रवाल, विनोद कुमार कोहली, विवेक अग्रवाल, प्रमिला चावला, ऋषभ कुमार गुप्ता, अखिलेश दुबे, आशीष माहेश्वरी, डीके भसीन, मनोहर केसवानी, प्रोफेसर वेद प्रकाश त्रिपाठी, विशाल बंसल, सुनील, अंकुर, अंशुल अग्रवाल, आदि‍ भी सम्‍मलि‍त थे।