December 2, 2019

आगरा सि‍वि‍ल एन्‍कलेव का इंटरनेशनल सुवि‍धा वाले एयरपोर्टों की सूची में बनाये रखना होगा चुनौती

--स्‍विस फर्म की जैबर  में भागीदार तय हो जाने के बाद आगरा के सि‍वि‍ल एनकलेव का रास्‍ता भी साफ
अब शायद शि‍फ्ट हो सके धनौली
 

आगरा  : सि‍वि‍ल एन्‍कलेव आगरा को धनौली में शि‍फ्ट कि‍ये जाने का रास्‍ता अब लगभग साफ हो गया है, जि‍सका कारण ग्रेटर नौयडा के जैबर में बनाये जाने को प्रस्‍तावित इंटरनेशनल  एयरपोर्ट  के नि‍र्माण एवं दीर्घकालीन संचालन के  लिए ठेकेदार कंपनी के रूप में ज्यूरिख  फ्लूगफेन ज्यूरिख एजी,कंपनी को ठेका आवंटि‍त कि‍या जाना है। वर्तमान में यह कंपनी ज्‍यूरि‍ख इंटरनेशनल एरपोर्ट का संचालन कि‍या करती है। 
--नौयडा का उलझाव फि‍लहाल थमा
नौयडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लि‍मि‍टेड जो कि‍ उ प्र सरकार की स्‍पेशल परपज
व्‍ळैकि‍ल के रूप गठि‍त कंपनी है, को पी पी पैटर्न पर वि‍कसि‍त करने के लि‍ये नि‍वेशक की तलाश थी। जो कि‍ अब ज्‍यूरि‍ख एयरपेर्ट लि के नि‍वेशक और वि‍कसि‍त कर्त्‍ता के रूप में चयन के साथ पूरी हो चुकी है।
  हालांकि नौयडा के एयरपोर्ट और आगरा  प्रस्‍तावि‍त पं. दीन दयाल उपापध्‍याय सि‍वि‍ल एन्‍कलेव के बीच कोयी आधि‍कारि‍क या परोक्ष संबध तो नहीं है कि‍न्‍तु  कि‍न्‍तु सरकारी तंत्र मानता था कि अगर आगरा का एयरपोर्ट प्रोजैक्‍ट जैबर के प्रौजैक्‍ट से पहले शुरू हो गया तो इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लि‍ये शायद ही कोयी नि‍वेशक उत्‍साह दि‍खयें।
--सरकारी रुख सताय रहा 'आगरा'
हालांकि आगरा के प्राजैक्‍ट के लि‍ये फि‍लहाल नि‍जी नि‍वेशक ढूढने की कोशि‍श एयरपोर्ट अथार्टी या  सरकारी तंत्र के द्वारा अब तक नहीं की गयी । यही नहीं जब भी सि‍वि‍ल एन्‍कलेव के प्रोजैक्‍ट को आगे बढाये जाने की कोयी कोशि‍श हुई सरकारी तंत्र ने इसे उलझाये रखने के कारनामे ही कि‍ये। 
-- पं दीन दयाल उपाध्‍याय जी का  नाम रखना भी रहा बेअसर
सरकार में बनी हुई इसी उत्‍साह हीनता के कारण सत्‍तादल के आदर्श माने जाने वाले पडि‍त दीन दयाल उपाध्‍याय का नाम जुड जाने के बाद भी लटकाये रखने के काम को जारी रखा गया और ग्रेटर नोयडा के प्रस्‍तावि‍त इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम ताज इंअरनेशनल एयरपोर्ट कर दि‍या गया। यह बात अलग है कि‍ बाद में आगरा के एयरप्रोजैट को लेकर सक्रि‍य सि‍वि‍ल सोसायटी आगरा के द्वारा इलहाबाद हाईकोर्ट में इस पर जब आपत्‍ति‍ जतायी तो नाम से ताजमहल शब्‍द के हटा दि‍या गया। 
--आडीटरों के स्‍कैनर पर है 1.5 अरब का नि‍वेश   
अबतक सरकार सि‍वि‍ल एन्‍कलेव प्राजैक्‍ट पर 1.5 अरब रुपये खर्च कर चुकी है और यह इन्‍वैस्‍टमैंट अब उ प्र वि‍धान मंडल की वि‍त्‍तीय एवं प्रबंधन से संबधि‍त कमैटि‍यों के सदस्‍यें के स्‍कैनर र भी है।इस लि‍ये अगर यह प्राजैक्‍ट आगे नहीं बढा तो राजनैति‍क हल्‍कों में सुर्खि‍यां बटोर सरकारी तंत्र और सत्‍तादल के कई दि‍ग्‍गजों के लि‍ये समस्‍या कारक साबि‍त हो सकता है।ने वाला साबि‍त हो सकता है।
अब जब कि सुप्रीम कोर्ट का रुख  आगरा के प्रोजैक्‍ट  को लेकर अब पूरी तरह से स्‍पष्‍ट है और इसके चलते शायद ही अब इसे ताज महल और एन्‍वायरमैंट क्‍लीयरैस के नाम पर रोका जाना संभव हो।
-- इंटरनेशनल स्‍टेटस बनाये  रखना अब नयी चुनौती
अगर कोयी  चुनौती रह गयी है तो वह है क्‍लीयरैस मि‍लने के बावजूद आगरा के सि‍वि‍ल एन्‍कलेव को अब तक मि‍ला रहा इंटरनेशनल फ्लाइटों को हैडलि‍ग करने का मौजूदा दर्जा बरकरार रखना। जि‍से कि‍ जैबर एयरपोर्ट का एक वि‍डर खत्‍म करवाने को आंतरि‍क रूप से अति‍ सक्रि‍य था , यह बात अलग है कि‍ अब इस कंपनी को मौका नहीं मि‍ला।  
दरअसल ग्रेटर नौयडा के इंअरनेशनल एयरपोर्ट घोषि‍त हो जाने के बाद से नागरि‍क उड्डयन क्षेत्र मे पकड रखने वाली एक सशक्‍त लावी आगरा के सि‍वि‍ल एन्‍कलेव को इंटरनेशनल सुवि‍धाओं वाले एयरपार्टों की सूची में डाले रखना उपयुक्‍त नहीं मानती और  यहां की सुवि‍धायें उच्‍चीकृत करते रहना गैर जरूरी समझती है ।
वैसे स्‍थति यह है कि आगरा के सि‍वि‍ल एन्‍कलेव को अगर इसके बि‍ना कि‍सी स्‍टेटस बदलाव के एयरुोर्स स्‍टेशन आगरा से बाहर लाया जाना संभव हो सका तो यह स्‍वत: ही इंटरनेशनल फ्लाइटों के लि‍ये एक बडा आकर्षण होगा।

--सि‍वि‍ल सोसायटी करती रहेगी चौकसी
अनि‍ल शर्मा  

सि‍वल सोसायटी के जर्नल सैकेट्री अनि‍ल शर्मा ने कहा है, सि‍वि‍ल एन्‍कलेव का एयरुोर्स स्‍टेशन से बाहर लाया जाना राष्‍ट्रीय सुरक्षा और नागरि‍क अवस्‍थापना सुवि‍धा सहज संभव करने के लि‍ये कि‍तना जरूरी है, इसको बताने की अब जरूरत नहीं है । उन्‍होंने कहा कि‍ ताज ट्रि‍पेजि‍यम जोन अथार्टी के अधि‍वक्‍ता अगर आगरा का पक्ष सशक्‍त तरीक से रख सके तो नि‍श्‍चि‍त रूप से हक में ही फैसला रहेगा। सरकार के आि‍वक्‍तओं को तथ्‍यपरक जानकारि‍यां उपलब्‍ध कराने का दयायि‍त्‍व सोसायटी स्‍वत: स्‍वयं सेवी भाव से उपलब्‍ध करवा चुकी है।बस इन कनटैंटों का सही प्रकार से उपयोग सुनि‍श्‍चि‍त कि‍याजाना चाहि‍ये।