January 18, 2018

अवैध लैंडबैंको को लाभ पहुंचाने के लिये सिविल एन्‍कलेव में की जारही है देरी

--एडवोकेट जनरल को खुद ही बैंच के समक्ष रखना होगा सरकार का पक्ष
पार्षद डा शिरोमणी सिंह, सिविल सोसायटी के जनर्ल सैकेट्री अनिल
 शर्मा  एवं जर्नलिस्‍ट राजीव सक्‍सेना।

आगरा : सिविल  एयर एन्कलेव बनाये जाने के लिये उ प्र सरकार अब तक जरूरत की  जमीन एयरपोर्ट अथार्टी को उपलब्ध  क्यों नहीं करवा सकी  है।यह जानकारी  सिविल सोसायटी की अपने समक्ष  विचाराधीन याचिका की  सुनवायी के दौरान इलहाबाद उच्च न्यायालय के  मुख्य न्यायधीष न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से बताने को कहा है। उपयुक्‍त जानकारी देने केलिये स्‍वयं प्रदेश सरकार के एडवोकेट जनरल से उपस्‍थित होने को कहा है।
 सिविल सोसायटी के द्वारा  मूल याचिका के साथ ही  सप्‍लीमेंट्री एफीडेविट दाखिल कर न्‍यायलय के संज्ञान में यह लाया गया है कि सिविल एन्‍कलेव केलिये  जमीन का अधकांश  भाग खरीदा जा चुका है किन्‍तु एमओयू
के अनुसार जमीन को उपलब्‍ध करवाने के काम में एक न एक कारण को बताकर टालने की प्रक्रिया अपनायी जार ही है। फलस्‍वरूप अबतक नये सिविल एन्‍कलेव कोबनायेजानेकाकाम शुरू ही नहीं हो सका है।
 याची के अधिवक्‍ता की ओर से न्‍यायलय के संज्ञान में यह भी लाये जाने का प्रयास कियागया है नये सिविल एन्‍कलेव को बनाये जानें के काम को यूही लंवित नहीं किया जा रहा है।दरअसल इसके पीछे प्रभावशाली लोगों के द्वारा सरकार में अपनी दखल क्षमता का उपयोग कर नेशनल कैपीटल जोन में एक नये एयरपोर्ट  को विकसित करवाने के काम में अधिक दिलचस्‍पी ली जा रही है। इस का मकसद एन सीआर क्षेत्र में प्रस्‍तावित अन्‍य एयरपोर्ट  के आधार पर अवैध लैडबैंक (12 एकड से अधिक की सीचित भूमि पर कामालिकाना हक)के मालिकों को फायदा पहुंचाने की अपरोक्ष कोशिश है। 
  सरकार केद्वारा नया सिविल एन्‍कलेव बनायेजाने का मार्ग प्रशस्‍त करने से जहांकुछ खासको मुनाफा कमवायेजाने काप्रयास कियाजा रहा है वहीं व्‍यापक संभावनाओं केबावजूद आगरा सिविल एन्‍कलेव का राजकोषीय घाटा देने वाली संपत्‍ति बनाया हुआ है। लगभग 10 करोड रूपये प्रतिवर्ष आगरा के मौजूदा सिविल एन्‍कलेव पर खर्च होते हैं।वायुसेना परिसर में होने केकारण इसतकपहुंच बेहद मुश्‍किल भरी होती है।फलस्‍वरूप नतो विदेशी पर्यटकों की यात्रा प्रबंधन करने वाले ट्रैविल ऐजेंट और एजैंसियां ही इसे रिक्‍मंडकरती हैंऔर नहीं स्‍थानीय नागरिक ही यहां सेउडान भरना या यहां उतरना पसंद करते हैं।
सोसायटी के एडवेकेट केद्वारा एफीडेविट दाखिल करते समय  न्‍यायलय केसंज्ञान में यह भी लाया गया है कि जमीन खरीद की स्थिति तबबनी जबकि सिविल सोसायटी कीओर से 2अगस्‍त 2017 को  याचिका दाखिल कर भारत सरकार केनागरिक उड्डयन मंत्रालय और उप्र सरकार केबीच14फरवरी 2014 के एमओ यू को क्रियान्‍वित करने का मामला उठाया । तब14अगस्‍त 2017को शासन के द्वारा 64,94,03,990रुकी राशि अवमुक्‍त करनी पडी।  
  सिविल सोसायटी की ओर से एडवोकेट अकलंक कुमार जैन ने न्‍यायलय सेअनुरोध किया है कि आगरा सिविल एन्‍कलेव के लिये दाखिल अपनी याचिका ( सिविल मिसलीनियस रिटपिटीशन संख्‍या33628 वर्ष 2017) को भी निगरानी याचिका केरूप में स्‍वीकार की जा चुकी याचिका ( संख्‍या 9552 वर्ष2016-अजय कुमार मिश्रा वि. उत्‍तर प्रदेश सरकार )केसाथ ही सम्‍मलित करनेकाअनुरोध किया है। श्रीमिश्र की याचिका इलहाबाइ में नये सिविल एन्‍कलेव बनायेजानेकोलेकरहै।जिसे कि आगरा केसमान हीउप्रसरकारनेएमओयू करने केबावजूदलटकारखा है।न्‍यायलय ने श्रीमिश्रा कीयाचिका को गंभीरता से लिया है और न्‍यायलय के द्वारा इसकी प्रतिपर सीधी नजर रखी जा रही है।चूंकि आगरा का मामला भी इलहाबाद जैसा ही है और दोनो में ही उप्र सरकार ही विलंब का कारण है अत: उन पर एकसाथ ही निगरानी रखीजाये।
प्रेस वार्ता को संबोधित करने वालों में सिविल सोसायटी केअध्‍यक्ष पार्षद डा शिरोमणी सिंह  जनरल सैकेट्री अनिल शर्मा एवं पत्रकार राजीव सक्‍सेना शामिलथे।