28 मार्च 2021

आगरा के कामयाब उद्यमी हरिकिशन की पहली सीढ़ी थी रिक्शा चलाना

 

आगरा। कहते हैं यदि दृढ़ संकल्प मज़बूत हो तो सब कुछ संभव ।  ऐसी ही कहानी रही है आगरा के हरिकिशन पिप्पल की। बचपन से ही खाए हैं गरीबी के थपेड़े हरिकिशन पिप्पल के पिता उत्तरप्रदेश के आगरा में जूते बनाने की एक छोटी-सी फैक्टरी चलाते थे।वे जातिवादी भेदभाव के  भी शिकार रहे थे , लेकिन विपरीत परिस्थितियों व बड़ी-बड़ी चुनौतियों के सामने उन्होंने कभी हार नहीं मानी 

 तबीयत कुछ इस तरह से बिगड़ी कि पिता काम करने की स्थिति में नहीं रहे, इसीलिए घर-परिवार चलाने की जिम्मेदारी हरिकिशन के कंधों पर आ गयी। घरवालों को बताए बिना वे शाम को साइकिल-रिक्शा चलाने लगे जो उनके मामा के बेटे की थी। कोई उन्हें पहचान न ले इस मकसद से वे अपने चेहरे पर कपड़ा लपेटकर साइकिल-रिक्शा चलाया करते थे। पिता की फैक्ट्री दोबारा शुरु करने के फैसले

25 मार्च 2021

आगरा ने मुझे सैन फ्रिसको फुटवियर ब्रांड के निर्माता तक पहुँचाया - कुलदीप सिंह

 

( कुलदीप सिंह )
आगरा में पैदा होने के कारण बचपन से ही मैं  फुटवियर प्रेमी था जिसने मुझे अपने फुटवियर ब्रांड सैन फ्रिसको के निर्माण तक पहुँचाया , यह कहना था कुलदीप सिंह जी का । उन्होंने कहा  आगरा में पैदा हुआ और पाला गया, मैं उन बच्चों से घिरा था जिनके माता-पिता जूता निर्माता, खुदरा विक्रेता और व्यापारी थे।  

खुद एक जूता प्रेमी होने के नाते, आगरा निवासी कुलदीप सिंह ने 1993 में जूता उत्पादन लाइन में उतरने का फैसला किया। वह अपने ब्रांड के लिए एक जगह बनाना चाहता था।

अपने कॉलेज के ठीक बाद, 1993 में, कुलदीप के परिवार ने उन्हें 2 लाख रुपये की छोटी राशि उधार देकर एक जूता कारखाना स्थापित करने में मदद की। पहले 12 वर्षों के लिए, उन्होंने अन्य ब्रांडों के लिए जूते के निर्माण का अनुबंध किया। ऑर्डर्स  की कमी के कारण उन्होंने  अपना पैसा तेजी से खो दिया।

23 मार्च 2021

अबकी होली ट्राइब्स इंडिया वाली

 

होली का रंगारंग त्यौहार जैसे जैसे निकट आ रहा है, देश के कोने-कोने में इस उत्सव की धूम मची हुई है, ऐसे में ट्राइब्स इंडिया ने अपने आकर्षक और व्यापक प्रकार के जनजातीय उत्पादों को अद्यतन किया है। इसकी सूची, दुकानों और वेबसाइट के भौतिक नेटवर्क दोनों में होली के त्योहार के लिए विशेष उत्पादों का भंडार इकट्ठा किया गया है।

पुरुषों और महिलाओं के लिए रंगीन कुर्ते, विभिन्न प्रकार की बुनाई और शैलियों में बंडी, साड़ी, विभिन्न परंपराओं जैसे महेश्वरी, चंदेरी, बाग, कांथा, भंडारा, टसर, संभलपुरी और इकत में परिधान और स्टॉल होली संग्रह का एक हिस्सा है। संग्रह में प्राकृतिक, हर्बल उत्पाद जैसे जैविक गुलाल, जैविक साबुन, शैंपू, हर्बल तेल और पैक शामिल हैं। शर्बत, स्क्वैश, सूखे मेवे जैसे काजू और शहद की विभिन्न किस्में इस विशेष संग्रह का एक हिस्सा हैं। जैविक रंग और सूखे मेवे

आगरा के नूरी दरवाज़े से हमेशा जुड़ा रहेगा शहीद भगत सिंह का नाम

 

आगरा - क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह का  नाम से आगरा के नूरी दरवाज़े से हमेशा जुड़ा रहेगा। वह नूरी दरवाज़े  स्थित एक दो मंजिला मकान जो आज भी मौजूद है, में करीब एक वर्ष तक अपने  साथियों के साथ रहे थे। वर्तमान में  नूरी दरवाजे के इस  मकान की हालत खस्ता नज़र आती है। शहीद भगत सिंह के मकान के  ठीक सामने स्वामी बैनी प्रसाद की दुकान है, जहाँ वह  दूध, मिठाई लिया करते थे, जो बाद में उनकी गिरफ्तारी के बाद शिनाख्त के लिए कई बार लाहौर  भी  गए थे। वह  खासतौर से पढ़ाई के लिए आगरा आए थे। उन्होंने नूरी दरवाज़े आगरा के  दो मंजिला मकान में महत्वपूर्ण रणनीति  तैयार की थी। नूरी दरवाज़ा वर्तमान में पेठा बाजार के नाम से मशहूर है। उन्होंने  अपना नाम बदलकर बलराज रखा था। एक वर्ष में वह हींग की मंडी और नाई की मंडी भी रहे। उनके साथी भगत सिंह के साथ  कैलाश, सिकंदरा, कीठम तथा  भरतपुर के जंगलों में वह क्रांतिकारी हथियारों से निशाना लगाने की प्रैक्टिस किया करते थे । 

22 मार्च 2021

फुटपाथों की भारी कमी आगरा की सड़कों पर

 

( फुटपाथ की कमी )
आगरा में पैदल चलने वालों, गैर मोटर चालित उपयोगकर्ताओं के लिए एक अब बहुत कम जगह बची है, सड़कों पर चलना और उन्हें पार करना अब आसान नहीं। यहाँ फुटपाथों का भारी  आभाव है।  जबकि हर नागरिक शहरों में अपनी यात्रा के कुछ हिस्से के लिए पैदल यात्री होता है ।फुटपाथ और सही  स्ट्रीट लाइटिंग की कमी ने पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों के जीवन  को जोखिम भरा बना दिया। जबकि  सड़क पर चलने वालों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।  शहर  में सड़कों की  डिजाइन और नियोजन में  दृष्टिकोण कार-केंद्रित न होकर पैदल लोगों की ओर विशेष रूप से  केंद्रित होना चाहिए। हमें पैदल चलने वालों के लिए अधिक जगह बनाने के तरीकों के बारे में सोचना चाहिए।

सड़कों पर पैदल चलने वालों के लिए  सुरक्षित क्रॉसिंग भी न के बराबर हैं  । सुरक्षित क्रॉसिंग न होने पर बुजुर्ग लोगों  का सड़क पार करना प्रायः असंभव है। शहर में   ऐसे उपाय अपनाना अति  आवश्यक  जिससे पैदल  यात्रियों को सुरक्षा  महसूस हो।