--मुख्यमंत्री ने केन्द्र को पत्र लिख मांगे 252.30 करोड
--अधिकांश काम भरपूर पैसा खर्च हो जाने के बावजूद अधूरे...
आगरा, उत्तर प्रदेश को एक बार फिर से ज एन एन आर एम फंड की याद आयी
है और योजना के तहत अवशेष रह गये कामों के लिये 252.30 करोड रुपये की मांग की है...आगरा,मथुरा,कानपुर, मेरठ,लखनऊ,बरेली,मथुरा और इलहाबाद सहित राज्य के सभी प्रमुख नगर इस योजना के तहत लिये गये थे।प्रोफेशनल कंपनियों से इनकी सी डी पी (सिटी डव्लपमेंट प्लांट) तैयार करवायी गयी थीं।अरबों रुपये काम पर खर्च कर दिये जाने के बावजूद अधिकांश योजनयें ठीक प्रकार से पूरा होना तो दूर उनके तहत जरूरी काम तक नहीं हो सके हैं।
सी डी पी के नाम पर बनायी गयी कार्ययोजनाओं में महानगरों के अवस्थापना
संबधी सुविधाओं के विकास पर खास तोर से बल दिया गया था,जबकि एक भी महानगर मे
कोई भी लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। यहां तक कि नगर निगमों की कार्यंसंस्कृति
बदलने के लिये ई.गवर्नेंस जैसे साधारण लक्ष्य तक पूरे नहीं किये जा सके।सबसे
अधिक धन शहरी क्षेत्रों को सीवर लाइनों से अच्छादित करने पर खर्च किया गया किन्तु
योजना के बन्द किये जाने की घोषणा होने तक जेनार्म के तहत लिये गये शहरों में
25प्रतिशत तक लक्ष्य पूरे नहीं किये जा सके।
आगरा में सीवर लाइनें डालने के हुए काम की जांच के लिये तो आगरा के
मंडलायुक्त के द्वारा दो ही दिन पूर्व शान को लिखा जा चुका है।उनका आंकलन है कि
सीवरी करण के काम में भारी अनियमित्ता हुई है।वैसे यू पी के अन्य शहरो की हालत
तो ओर भी खराब है।
महानगरों की सार्वजनिक परिवहन सेवा के लिये भी पयाप्त संख्या में
बसें उपलब्ध करवायी गयी थी। नगर निगम के तहत इनका संचालन अलग से कार्यदायी संस्था
बनाकर होना था।किन्तु नगर निगम को एक ओर करके प्रशान के द्वार परिवहन निगम के
सहयोग को तरजीह दी गयी। आगरा सहित कई शहरों में यह सेवा पूरी तरह से फ्लाप साबित
हुई।जिला प्रशासन इन बसों के लिये न तो सुविधाजनक स्टाप और न हीं डिपुओं और
वर्कशापों के लिये उपयुक्त व्यवस्था ही उपलब्ध करवा सके।आगरा में तो जनार्म
के तहत मिली बसों में से आधी अत्यंत ख्राब हो चुकी हैं। सिटी बस सेवा लगातार
घाटे में चलने से बसों के अनुरक्षण के लिये जरूरी धन का शुरू से ही अभाव रहा है।
एक दिलचस्प तथ्य यह है कि जेनार्म की योजनाओं को धन उपलब्ध
करवाने में केन्द्र सरकार की ओर यू पी के साथ जहां पूरी उदारता बरती गयी वहीं राज्य
के ही नगर विकास की ओर से ही जबरदत रोडे अटकाये गये।एक एक करवाये काम की कई कई
बार जांच हुई। काम के ठेके दबाव में अक्षम और गलत ठेकेदारों को दिलवये गये।भारत
सरकार को प्रोजेक्ट का फीडबैक तक कभी भी समय से नहीं भेजा जा सका। कैग की आपत्तियों
तक को खा तव्व्जोह नहीं दी गयी।नई केन्द्र सरकार ने देश में सौ नये स्मार्ट सिटीर
बनाये जाने की तो योजना पिछले बजट के दौरान ही घोषित कर दी है किन्तु मौजूदा
शहरों के बारे में जेनार्म को कोई विकल्प अब तक सरकार प्रस्तुत नहीं कर की
है।अब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने ताजा तरीन पत्र में केन्द्रीय वित्त
मंत्री को लिख्कर 252.30 करोडकी मांग की है।
