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November 18, 2017

तीर की जगह ऑटो रिक्शा से ही काम चलाएंगे शरद यादव

चुनाव आयोग  द्वारा  शरद यादव वाले जदयू से चुनाव चिह्न् 'तीर' छिनने के बाद शरद के लिए गुजरात चुनाव में थोड़ी परेशानियां बढ़ गई  हैं। उनकी पार्टी गुजरात में  ऑटो रिक्शा चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ेगी।जदयू  के बागी नेता शरद यादव ने कहा   कि चुनाव आयोग द्वारा जदयू पर उनके दावे को खारिज करने की  उन्हें पहले ही अशंका  होने के कारण  उन्होंने गुजरात विधानसभा चुनाव के मद्देनजर रखते हु  अपनी पार्टी बनाने की पूरी  तैयारी कर ली थी। शरद यादव  ने पार्टी का नाम नहीं बताया है  सिर्फ इतना ही कहा कि उनकी पार्टी  ऑटो रिक्शा चुनाव चिन्ह पर गुजरात में चुनाव लड़ेगी।चुनाव आयोग के फैसले से मेरे  संघर्ष के रास्ते को विराम नहीं मिला है। 

September 12, 2017

शरद यादव के हाथ से गया चुनाव चिन्ह

जद (यू) के विद्रोही  नेता शरद यादव द्वारा  पार्टी के चुनाव चिन्ह पर अपने गुट के दावे को चुनाव आयोग ने  खारिज कर दिया। आधिकारिक सूत्रों ने  बताया  कि  संबंधित दस्तावेजों के न होने  के कारण आयोग ने शरद यादव के आवेदन को खारिज  कर दिया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजद के साथ गठबंधन तोड़ने और बीजेपी के साथ हाथ मिलाने का विरोध करने के बाद, जेडी (यू) के पूर्व अध्यक्ष ने चुनाव आयोग से संपर्क कर  उन्होंने असली जेडी (यू)  बताते हुए पार्टी के चुनाव चिन्ह  के लिए दावा किया  था ।बाद में, नीतीश ग्रुप  ने भी  अपने समर्थन में आयोग में  हलफनामे जमा करा दिए थे।

March 30, 2017

एग्जिट पोल को चुनाव आयोग ने किया एग्जिट

एग्जिट पोल पर चुनाव  आयोग ने पाबन्दी लगा दी है।चुनाव प्रक्रिया के दौरान चुनाव परिणामों को लेकर किसी भी तरह की तरह की भविष्‍यवाणी के प्रसारण पर आयोग द्वारा  प्रतिबंध लगा दिया गया  है। भावी चुनावों में  ज्‍योतिषी और टैरो कार्ड रीडर चुनाव से सम्बंधित  कोई भी भविष्‍यवाणी नहीं कर सकेंगे। यह मामला हाल ही में हुए उत्तर प्रदेश के चुनावों में उस समय प्रकाश में आया जब उत्तर प्रदेश के पहले चरण के विधानसभा चुनाव के बाद शाम को दैनिक जागरण की वेबसाइट पर एग्जिट पोल जारी  किया गया था। एग्जिट पोल में अन्य पार्टियों पर भाजपा की बढ़त दिखाई गई थी। दैनिक जागरण ने सर्वे में बीजेपी को सबसे ऊपर दिखाया गया था  दूसरे नंबर पर बसपा और तीसरे नंबर पर सपा-कांग्रेस के गठबंधन दर्शाया गया  था। इस सम्बन्ध में पोर्टल  के  संपादक शंशाक शेखर त्रिपाठी को  गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें लोकल  कोर्ट में जमानत मिलने पर रिहा कर  दिया गया था ।