September 18, 2019

जगनेर की बन्‍धि‍यों से थमा अनपेक्षि‍त जल-रि‍साव

-- सुध्रडीकरण की कोशि‍शों कम वर्ष के बाबजूद कई हुई पानी से भरपूर 
वि‍पुल जलराशि‍ से भरपूर जगनेर की मेवली बंन्‍धी।
जलरि‍साव रोकने से पानी ठहरा। फोटो:असलम सलीमी
 (राजीव सक्‍सेना ) आगरा: खेरागढ तहसील का जगनेर वि‍कास खंड अरावली पहाडि‍यों के घेरे में स्‍थि‍त है,अत्‍यंत सीमि‍त हरि‍याली की दृष्‍यता वाली इन पहाडि‍यों के बीच से होकर दर्जनों नाले और कुछ नदियां हैं जो कि साल भर सूखे और महत्‍वहीन से रहने के बाद मानसून काल शुरू होते ही दूरस्‍थ पहाडी क्षेत्र में पडने वाले  पानी से प्रस्‍फुटि‍त जलधाराओं के वाहक बनजाते है। इन्‍ही बरसाती नालों और बरसाती नदि‍यों को उपयुक्‍त स्‍थानों पर थाम कर जलभंडारण और उसके नि‍यंत्रण का जो कार्य कि‍या गया है वही जगनेर की बन्‍धि‍यों   का मूल
आधार है। 
--सि‍चाई वि‍भाग करवाता है नि‍यमि‍त गेजि‍ग
 उ प्र की सीमा मे पडने वाली इन बंधि‍याकी कुल संख्‍या 44 है कि‍न्‍तु सिचाइ्र वि‍भाग वर्तमान में 30 से अधि‍क की ही अपने स्‍तर से अनुरक्षण और गेज रीडिग करता
है।तीन महीने से अधि‍क इनमें पानी भरा रहता है। पानी को कुछ   पीने के पानी की कमी और लगातर गि‍रते भूगर्भ जलस्‍तर से जनपद को जनपद के जगनेर वि‍कास खंड की बंधि‍यों सहजता के साथ नि‍जात दि‍लवा सकती है ,वशर्त इनकी भरण क्षमता बनाये रखने के लि‍ये व्‍यापक कार्ययोजना बनाकर  उसके क्रि‍यान्‍वयन के लि‍ये सि‍खई वि‍भाग को जरूरत के धन सहि‍त सभी संसाधन उपलब्‍ध करवाये जायें। नजात पाने को सरकार और नागरि‍क संगठन बेहद परेशान हैं लेकि‍न अब तक कोयी ठोस योजना समस्‍या के समाधान के रूप में नहीं दे सके हैं।
चम्‍बल-उटंगन बेसि‍न है बन्‍धि‍यों का जलग्राही क्षेत्र
चम्‍बल उटंगन नदि‍यों के बेसि‍न में पार्वती और कि‍बाड नि‍दयों के जलग्राही क्षेत्र  में जगनेर की ये बन्‍धि‍यां स्‍थित हैं। 15जून को इनके गेट गरा दि‍ये जाते हैंं और आधि‍कारि‍क तौर पर रबी की फसल की बुबाई के पूर्व 15अक्‍टूबर को ये खोल दि‍ये जाते हैं। यह पूरा पानी बन्‍धि‍यों से छूट कर सीधा उटंगन नदी में पहुंचता है और इस नदी के माध्‍यम से यह बडी जलराशि‍ बटेश्‍वर के अपस्‍ट्रीम में फतेहाबाद तहसील के रहावली गांव के पास यमुना नदी में समाजाती है।
सिचाई वि‍भाग ने दुरुस्‍थ  की कइ बंधि‍यां  ‍
सिचाई ‍वि‍भाग के अधि‍शासी अभि‍यंता ,आगरा नहर लोअर खंड ) श्री अवधेश शर्मा ने इस वर्ष जगनेर की बन्‍धि‍यों में से कइ्र में पि‍चिग और गेट मेटि‍नेंस का कार्य काफी गंभीरता से करवाया है, फलस्‍वरूप पूर्व में पानी के अनपेक्षि‍त रि‍साब की जो स्‍थति‍ बन जाती थी इस बार काफी हद तक थमी है। इसी काउ परि‍णाम है कि‍ सीमि‍त वर्षा रहने के बावजूद जि‍न बन्‍धि‍यों में पानी पहुंच सका वह ठहरा हुआ है। वि‍धायक श्री महेश गोयल की कोशि‍शें और सि‍ंचाई वकभाग से कॉर्डीनेशन की रही कोशि‍श भी इस जलभराव और पि‍चि‍ंग कार्यकरवने को रहा दबाव भी इसके पीछे एक बडा करण है।
--आगरा के बेहद नजदीक होकर गुजरता है बन्‍धियों का डि‍स्‍चार्ज
 यह पूरी जलराशि‍ फतेहाबाद तहसील के नगला बिहारी (अरनौटा पुल के अपस्‍ट्रीम )  के पाससे होकर गुजरती है।आगरा से केवल 35 कि‍ मी दूर  इसी नगले में आगरा कैनाल के टर्मि‍नल राजवाह का टेल है जो उटंगन नदी पर समाप्‍त हो जाता है। ताजमहल से लेकर इंटावा के फि‍शर फारैसट में बनी लायन सफारी तक जाने वाला साइकि‍ल ट्रैक भी यही पर उटंगन नदी को सुघ्रकृत रपटे से होकर पार करता है। इस जलराशि‍ को यहां रोका जा सकता है। यह आगरा, बाह और फतेहाबाद तीनों के लि‍ये ही उपयोगी साबि‍त हो सकती है।