June 2, 2018

विसंगतियां दूर करें तभी 'रेरा' से रियल स्‍टेट सैक्‍टर को राहत

बाह्य विकास शुल्क के सापेक्ष विकास प्राधिकरणों के कार्यदायित्‍व तय हों
रेरा विशेषज्ञ व चार्टड एकांउटेन्ट ध्रुव सेठ ,ने एक्‍ट की विसंगतियों
पर  आगरा के रिअलस्‍टेट लीडरों से की खुली चर्चा। 
 आगरा: रियल स्टेट (नियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) एवं उसकी नियमावली में व्‍याप्‍त विसंगतियों को समय रहते दूर किया जाना जरूरी है, अन्‍यथा रियल स्‍टेट के कारोबारियों और आम उपभाक्‍ताओं के बीच उलझाव बढेगा और अधिनियम का क्रियान्‍वयन करवाने वाले तंत्र को  हस्‍तक्षेप करने के मनमाने अवसर बढेंगे। पी.एल. पैलेस में रेरा पर आयोजित कार्यशाला में लखनऊ से आये रेरा विशेषज्ञ व चार्टड एकांउटेन्ट ध्रुव सेठ ने कहा कि  उन्होंने 30 बिन्दुओं पर स्पष्टीकरण हेतु एक प्रतिवेदन रेरा अथोरिटी को दिया है, लेकिन अभी तक कोई
स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं हुआ है।
श्री सेठ ने कहा कि रेरा अधिनियम रीयल स्टेट सेक्टर के नियमन एवं विकास के लिए बनाया गया है , जिसके अन्तर्गत पारदर्शिता, उपभोक्ता के अधिकारों के संरक्षण एवं विवादों के समाधान अपेक्षित है,किन्‍तु खामियों का समाधान हुए बिना अधिनियम की व्‍यवहारिकता संदिग्‍ध है। उन्‍होंने कहा कि  रेरा की वेवसाइट में भी अनेकों कमियाँ हैं और अनेक अपेक्षित कदम भी अभी नहीं उठाये गये हैं।
श्री सेठ ने कहा कि अब उठाये जा चुके सवालों पर उदासीन बने रहने से काम नहीं चलेगा रेरा अथोरिटी को स्पष्टीकरण देना चाहिए ताकि रेरा का कार्यान्वयन सुगम हो सके। यह बात आज कार्यशाला का आयोजन आगरा सिटी रेडिको एवं क्रेडाई (आगरा चैप्टर) के संयुक्त तत्वाधान में हुआ, जिसमें विचार मंथन के लिए बिल्डर्स के अतिरिक्त आर्किटैक्ट एवं चार्टड एकाउटेन्ट भी उपस्थिति थे। 
 रेडिको अध्यक्ष के.सी. जैन रेरा की विसंगतियों पर विचार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि किसी परियोजना का बाह्य विकास शुल्क रेरा अधिनियम की धारा 13 (2) के अनुसार प्रोमोटर को ब्यौरा देना होता है किन्तु वर्तमान में प्रदेश में बाह्य विकास शुल्क प्राधिकरण के कोष में जमा किया जाता है जिसके द्वारा ड्रेनेज, सीवर, मास्टर प्लान सड़क व विद्युत लाइनें आदि बाह्य विकास सुविधायें विकसित करनी होती हैं जो समय से नहीं हो पातीं हैं। अधिनियम के अन्तर्गत बाह्य विकास शुल्क के सापेक्ष में कार्य करने की जिम्मदारी प्राधिकरण को नहीं दी गयी है, जो विसंगतिपूर्ण है और जिसके कारण आन्तरिक विकास कार्यों को करने के उपरान्त भी स्थल पर सभी सुविधायें उपलब्ध नहीं हो पातीं हैं।
कार्यशाला में यह बात भी आयी कि रेरा अधिनियम केवल नियमन हेतु नहीं, अपितु रीयल स्टेट सेक्टर के विकास के लिए भी है, जिसके लिए अधिनियम की धारा 32 के अन्तर्गत सिंगल विन्ड़ो, भूमि अभिलेखों का डिजिटेलाइजेशन व टाइटल इन्श्योरेन्स भी सम्मिलित है जिस पर अभी तक कोई भी कार्यवाही नहीं हुई है।
कार्यशाला में यह भी मुद्दा उठाया गया कि  निजी सेक्टर की अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका है जिसे राष्ट्रीय आवास नीति-2007 एवं प्रदेश की आवास नीति-2014 में स्वीकार किया गया है, जिसको देखते हुए अच्छे व साफ सुथरा कार्य करने वाले निजी क्षेत्र के विकासकर्त्ताओं को आवश्यक सुविधायें प्रदान किया जाना जरूरी है। मानचित्र व  अन्य अनापत्तियां भी समयबद्ध रूप से मिलनी चाहिये। सभी ने यह भी कहा कि रेरा के बाद पारदर्शिता बढ़ी है और अच्छे बिल्डरों के अपार्टमेण्ट की मांग भी बढ़ी है।
उपस्थिति चार्टड एकाउटेन्ट व आर्किटैक्ट द्वारा भी सी.ए. सेठ से जिज्ञासायें रखी गयीं, क्योंकि रेरा अधिनियम के अन्तर्गत चार्टड एकाउटेन्ट व आर्किटैक्ट द्वारा प्रमाण पत्र निर्गत किये जाने के प्रावधान हैं।
मुख्य वक्ता का स्वागत क्रेडाई अध्यक्ष सुमित गुप्ता विभव एवं रेडिको अध्यक्ष के.सी. जैन द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन हेमन्त जैन द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में सुशील गुप्ता, इन्दर जैन, रविशंकर अग्रवाल, मनीष बंसल, छोटेलाल बंसल, गौतम रावत, नीतेश गर्ग, विकास फौजदार, सी.ए. दीपेन्द्र मोहन, सी.ए. सर्वेश वाजपेई, सी.ए. संजय मेहरा, सी.ए. गौरव गोयल, आर्किटेक्ट समीर गुप्ता, बिल्डर पी.एल. शर्मा आदि अनेक उपस्थित थे।