October 9, 2017

जैव ऊर्जा क्षेत्र में होने जा रही हैं रोजगार की नई संभावनायें

यमुना वैटलैंड परिसर की संभावित उपयोगिता पर शासन करेगा विचार

उ प्र जैव ऊर्जा बोर्ड के सैकेट्री मेम्‍बर पी एस ओझा,पर्यावरण
विद रमन,एन सी जैन एवं पूरन डावर आदि
फोटो:असलम
आगरा: वैकल्‍पिक ऊर्जा क्षेत्र अब देश में अपनी पहचान बना चुका है और गांवों में  इसकी पहुंच होने के साथ ही उपयोगिता भी प्रमाणित हुई है।अब इसे रोजगार से सीधा जोडने की योजनाओंको प्रदेश भर में प्रभावी करवाया जा रहा है। यह कहना है उप्र राज्‍य जैव ऊर्जा बोर्ड के मेम्‍बर सैकेट्री पी एस ओझा का, जो कि आगरा में ककरैठा बन ब्‍लाक के तहत यमुना वैट लैंड परिसर के इंटरपिटेशन हॉल में स्‍थानीय पर्यावरणविदों एवं जैव ऊर्जा क्षेत्र में कारोबारी रुचि रखने वालों को
संबोधित कर रहे थे।
श्री ओझा ने कहा कि वनोपजों और पेडों के व्‍यवसायिक लाभ के लिये उगाने को प्रोत्‍साहित करने के लिये प्रस्‍तावितवन नीति में व्‍यापक संभावनायें विद्यमान हैं। इसी प्रकार फसल कटाई के बाद खेतों में रहजानेवाले अवशेषोंको इंधन में तब्‍दीलकरने की टैक्‍नेलाजी प्रदेश में सहज उपलब्‍ध है। जैव अवशेषों से ऊर्जा बनाये जाने को आगे आने वाले उद्यमियों को सरकार की ओर से दस करोड तक के ऋण पर ब्‍याज सब्‍सिडी देने की योजना लागू है।
पी एस ओझा 
श्री ओझा ने कहा कि यमुना वैट लैंड को वह रोजगर की संभावनाओं से भरपूर मानते हैं। बोर्ड की उपयुक्‍त योजनाओं को वह यहां लागू करवाने के लिये बोर्ड की अगली बैठक में प्रमुख सचिव के समक्ष विस्‍तिृत योजना पेश करेंगे। एक जानकारी में बताया कि बोर्ड यमुना नदी के किनारे सघन वनक्षेत्र विकसित करने की योजना को प्रभावी बनाने जा रहा है। इन वन क्षेत्रों के फलस्‍वरूप जलसंरक्षण तथा रोजगार की संभावनायें बढेंगी।
सुप्रीम कोर्ट मानीटरिंग कमैटी के सदस्‍य श्री रमन ने श्री ओझा के ‘यमुना वैटलैंड’ का निरीक्षणकरनेआने पर आभार जताया और कहा कि इसके कारण तीन नालों का पानी बिना एस टी पी या पंपिगस्‍टेशन के ही आगरा महानगर के अपस्‍ट्रीम में नदी में गिरने से रोकाजाना संभवहुआहै। साथ ही बडा क्षेत्र हरियाली अच्‍छादित हो गया है।
वरिष्‍ठ उद्यमी श्री पूरनडावर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण नीति में आर्थिक समन्‍वय पक्ष के प्रति व्‍यवहारिकरवैयान रहने से निजीक्षेत्र में निवेश उत्‍साह कम हुआ है। फलस्‍वरूप रोजगार और नयें उद्योग लगाये जाने में अप्रत्‍याशित कमी आयी है।उन्‍होंने कहा कि ताज ट्रिपेजियम जोन की समस्‍याओंके बारे में सरकार और पर्यावरणविदों को पुनर्विचार करना चाहिये।
आगरा डव्‍लपमेंट फाऊंडेशन के सैकेट्री के सी जैन कहा कि मौजूदा प्‍लांटेशन नीति हरित क्षेत्र को सघनता और विस्‍तार देने के में अपेक्षित कामयावी वाली नहीं रही। निजिक्षेत्र तो दूर सरकारी लोककल्‍याणकारीयोजनाओं तक पर इसका प्रतिकूल असर रहा है। जहां पेड काटना जरूरी हो वहां इसकी आनुमति सहजता के साथ दी जानी चाहिये, बदले में करवाया जाने वाला प्‍लांटेशन वन विभागकोखुद अपनेस्‍तरसे चिन्‍हित जमीन पर अपने निर्देश में करवाना चाहिये।उन्‍होंने कहा कि ग्रीन कवर की सघनता और विस्‍तार के वह पक्षधर हैं। सर्वश्री राजेश कुमार, श्रवण कुमार आदि सहित दो दर्जन से अधिक की इस संवाद कार्यक्रममें सहभागिता रही।