September 15, 2017

हिंदी की स्वीकार्यता किसी की मोहताज नहीं

-- न्यायलयों मे  भाषा के रूप में हि‍न्दी पर ही बल दि‍या जाये
नागरी प्रचारि‍णी मानस भवन  अ. विश्वविद्यालय के कुलपति डा अरवि‍ंद कुमार दीक्षि‍त एवं पूर्व वि‍धायक केशो मेंहरा ने संबोधि‍त कि‍या हि‍न्‍दी दि‍वस समारोह
 आगरा: डा भीमराव अम्बेडकर वि‍श्ववि‍द्यालय के कुलपति‍ प्रो अरवि‍द कुमार दीक्षि‍त ने कहा है कि‍ हि‍न्दी कि‍सी भी भाषा की मौहतज नहीं है] इसकी सहज स्वीकारि‍ता इसके व्यापक प्रसार  का अहम कारण है।उन्होंने डा भीमराव अम्बेडकर वि‍श्ववि‍द्यालय में अपने कार्यकाल के दौरान सुधारों और शुरू हुयी आदर्श पहलों  की भी जनकारी दी।
उ प्र भाजपा के डौक्यूनमेंटेशन एवं लाइब्रेरी वि‍भाग के प्रमुख पूर्व वि‍धायक केशो मैहरा ने कहा कि‍ दयालबाग इंजीनि‍यरि‍ंग कॉलेज के 1965 में अध्यक्ष बने थे तब उन्होंने अपना भाषण हि‍न्दी में देकर तकनीकि‍ क्षेत्र के बुद्धि‍जीवि‍यों को यह समझाने का प्रयास कि‍या था

कि तकनीकि‍ क्षेत्र में भी हि‍न्दी को अध्ययन और अध्या‍पन का माध्‍यम बनाने का  प्रचलन को बढना चाहि‍ये।उन्होंने कहा कि‍ न्यायालयों में हि‍न्दी‍ का अधि‍कतम प्रयोग बढना चाहि‍ये। उन्होंने कहा कि‍ वह स्वंयं तो काफी समय से 'एक देश, एक नाम ’भारत’, देश की एक भाषा ‘हि‍न्दी भाषा’ नारे के प्रति‍ प्रति‍बद्ध हैं ही , और चाहते है कि‍ इस सोच को व्यापक समर्थन मि‍ले।
इस अवसर पर हि‍न्दी सेवी शशि‍ गोयल को सभा के पं जगन प्रसाद रावत पुरूस्कार से तथा डा रघुवर शरण ति‍वारी ‘शि‍खरेश’ को सभा के हि‍न्दी‍ प्रचार प्रसार में उल्लेाखनीय योगदान संबधी पुरुस्‍कार से  पुरुस्कृत कि‍या गया। कार्यक्रम में सर्वश्री बृज बि‍हारी लाल वर्मा ‘बि‍रजू’ डा राम अवतार शर्मा, चौ बदन सि‍ह, सुखराम सि‍ह, कै.व्यास चतुर्वेदी, डा राज कुमारी शर्मा, डा वि‍नोद महेश्वरी, डा वि‍वेक भटनागऱ,डा गि‍रीश चन्द्र शर्मा, डा मधुरि‍मा शर्मा, डा मधु भारद्वाज, प्रो सोम ठकुर, रामेन्द्र् त्रि‍पाठी, डा युवराज सि‍ह,डा गि‍रजा शंकर, चन्द्र शेखर अस्थ ना, भगवान सहाय, उप भारद्वाज, श्याम बाबू शर्मा, वि‍नीत गोस्वामी, सुनीत गोस्वामी, डा सूरज मुखी, शीलेन्द्रर पाल शर्मा,आदि‍ की आयोजन में सक्रि‍य भागीदारी रही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता नागरी प्रारि‍णी सभा की अध्यक्ष रानी सरोज गौरि‍हार ने की जबकि‍ संचालन सभा के उपाध्यक्ष डा खुशी राम शर्मा ने कि‍या तथा आभार सभा के महामंत्री चन्द्रस शेखर शर्मा के द्वारा व्यक्त कि‍या गया।‍