August 7, 2017

उ प्र में भू अधि‍ग्रहण तमि‍ नाडू की तर्ज पर करने को कहा

--लेबर एक्ट  में भी मजदूर का हक कमजोर करने की तैयारी
उजड जायेंगे खेत ,बन जायेंगी फैकट्रि‍यां ओर हवाई अडडे
आगरा: गोतम बुद्ध नगर के सबसे बडे प्रस्तावि‍त प्रोजेक्ट् जैबर के ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट और समाजवादी पार्टी की तर्ज पर ही लखनऊ से बि‍हार के वार्डर तक के सि‍क्स लेन एक्सप्रेस वे जैसे बहु प्रचारि‍त प्राजैक्टों  तक के लि‍ये भी योगी सरकार नि‍जी क्षेत्र के नि‍वेशकों को आकर्षि‍त नहीं कर सकी है। औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआइपीपी) के द्वारा दी गयी अधि‍कारि‍क जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 में जनवरी से दिसंबर के दौरान देशभर में कुल 4,14,086 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए जिसमें से मात्र 3.34 प्रतिशत निवेश के प्रस्ताव उत्तर प्रदेश के लिए आए। इस अवधि में यूपी में
मात्र 13,722 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए। इस प्रकार बीते वर्षो में भी देश में आए कुल निवेश प्रस्तावों में यूपी का हिस्सा बढ़ा नहीं है।
--सरकारी धन से ही करवाये जा रहे हैं पी पी प्रोजेक्ट्स
 समाजवादी पार्टी की अखि‍लेश सरकार मे जो कुछ हुआ वह तो अपनी जगह है ही वहीं भाजपा की योगी सरकार में तो हालात और भी खराब रहने के संकेत हैं। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे के लि‍ये अब तक कोई भी बडी फर्म मेंटीनेंस एंड आप्रेशन का काम ठेके पर लेने के लि‍ये आगे नहीं आ सकी है।जो आ भी रहे हैं व भी यमुना एक्सप्रेस वे जेसी शर्तों पर तैयार नहीं हैं। फि‍‍लहाल सरकार अपने ही पैसे से एक्सप्रेस वे पर रह गये कार्य करवा रही है।सबसे ज्यादा मुश्किल जैबर इंटरनेशनल ऐयरपोर्ट को लेकर है,कैबीनेट की क्लीययरैंस हो जाने के बावजूद संभावि‍त नि‍वेशकों में से एक भी आगे नहीं आया है। फलस्वरूप योगी सरकार पर ही इसे सरकारी खजाने से  20हजार करोड का नि‍वेश कर बनवाने का दबाव है।
  इस प्रजेक्ट में दि‍लचस्पी  रखने वाले दि‍ल्ली के असरदार राजनीति‍ज्ञ लखनऊ लाबी को समझा रहे हैं कि‍ कर्ज लेकर ही काम शुरू करो बस 2019 में लोकसभा चुनाव जीत जाने दो फि‍र कोई न कोई नि‍वेशक ढूढ ही लि‍या जायेगा। 
--नीति‍ आयोग सुझा रहा है अनीति‍
कि‍सानी न जाने कब हो जाये खत्‍म :हीरा मोती खतरे में
सबसे दि‍लचस्प भूमि‍का तो नीति‍ आयोग की है,जि‍सने उ प्र सरकार को सुझाया हे कि‍ अपेक्षा के अनुरूप औद्योगिक निवेश जुटाने में नाकाम रहने की स्थिति‍ से उबरने के लि‍ये श्रम सुधार लागू करे है।आयोग का कहना है कि यूपी सरकार को पूंजी निवेश आकर्षित करने के लिए औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 में संशोधन सहित मौजूदा श्रम नियम और कानूनों को उदार बनाना पड़ेगा। वस्तुकत: ये वही कानून हैं जि‍नमें मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी और मूलभूत सुवि‍धायें दि‍लवाना श्रम वि‍भाग की जि‍म्मेदारी है।मालि‍कानों और श्रम वि‍भाग की दुरभ संधि‍यों के चलते यह व्यनवस्थान प्रभावी भले ही नहीं हो कि‍न्तु श्रमि‍क के लि‍ये हक मांगने  का रास्ताू बन्द  नहीं करती साथ ही काम से हटाने का एक तरफा अधि‍कार भी नहीं कि‍या है।   
--लार्ड डलहौजी की हडप नीति‍ भी पीछे छोडने की तैयारी 
जमीन हडपने में नीति‍ आयोग का कि‍सानों की जमीन को लेकर सबसे ज्यांदा मानमाना रवैया है, अगर ऐसा नहीं होता तो वह कि‍सानों की जमीन को लेकर लार्ड डलहौजी की हडप नीति‍ जैसी कारगुजारि‍यां नहीं सुझाता। प्राप्त जानकारी के अनुसार नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पानगड़िया ने राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण कानून 2013 में भी ( तमिलनाडु की तर्ज पर) बदलाव करने को कहा है ताकि नयी परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आसान हो सके।इन सभी कानूनों में केवल भूमि‍ मालि‍कों के बारे में ही सोचा जाता रहा है। 
--भमि‍ पर आश्रि‍तों के बारे में कोई सोच नहीं 
जबकि‍ जमीन खास कर खेती और कारखानों के मामले में जमीन के मालि‍को से कही ज्याीदा जमन पर मेहनत मजदूरी करके रोजी रोटी कमाने वाले सबसे ज्यादा प्रभावि‍त होते हैं। अब जैबर एयरपोर्ट के लि‍ये चि‍न्हिटत जमीन को ही लें तो इसके अधि‍ग्रहण से जहां तीन से  पाच हजार परि‍वारों की जमीन जायेगी वहीं एक लाख से ज्यादा उन लोगों  के हाथ के काम छि‍नेंगे जो कि‍ जमीन के मालि‍क नहीं हें।