August 3, 2017

आगरा एन्कलेव याचि‍का को लेकर सरकार की तंद्रा भंग

--  सिविल सोसायटी उठायेगी जैवर में रि‍कार्ड दुरुस्‍ती और चकबन्‍दी करवाने का मुद्दा
(राजीव सक्‍सेना) आगरा: सि‍वि‍ल सोसाइटी आगरा   की ओर से सि‍वि‍ल एयर एन्कसलेव के लि‍ये दायर याचि‍का को लेकर उ प्र सरकार का रुख कुछ दि‍न के भीतर ही स्पष्ट हो पायेगा,जहां वादी बनाये गये सरकारी वि‍भाग काऊंटर हलफनामे दायर करने की तैयारी में हैं, वहीं नेशनल कैपीटल जोन की राजनीति‍ से जुडे कार्पोरेट सैक्टर के एक ‘जेंटलमैन’ अपने आगरा में  मौजूद संपर्कों  से एयरपोर्ट टर्मि‍नल के लि‍ये चि‍न्हिि‍त जमीन के कि‍सानों को भड़का  कर मुआवजा आंदोलन खड़ा करवाने को कह रहे हैं। जि‍सका उपयोग सरकार के एफीडेवि‍ट में करवा के आगरा के सि‍वि‍ल एन्कलेव का मामला कानून व्यवस्था से जुडा दर्शाकर फि‍र से ठंडे  बस्तेमें डलवा दि‍या जाये। जबकि‍ भाजपा के प्रदेश नेताओं का एक ग्रुप चाहता है कि‍ आगरा सि‍वि‍ल सोसायटी की तर्ज पर

कुछ और जनपदों से भी हवाई अड्डे की पैंडि‍ग मांग को लेकर याचि‍कायें दाखि‍ल की जायें, जि‍ससे कि‍ आगरा सि‍वि‍ल एन्क्लेव  का मामला लंवि‍त करवाया जा सके। ब्यूरोक्रेटों के आईने से राजनीति‍ कर रही यह लाबी फि‍लहाल एन सी आर , मैनपुरी, फीरोजाबाद, एटा ,कानपुर और गोरखपुर जनपदों के वि‍कास को ही प्रदेश सरकार का एजैंडा माने हुए है और इसमें कई गैर भाजपाई भी आंतरि‍क रूप से संलि‍प्त हैं।
दरअसल आगरा सि‍वि‍ल एन्कमलेव आगरा ही नहीं राष्ट्रीय पर्यटन उद्योग की जरूरत है कि‍न्तु एन सी आर क्षेत्र में तमाम रि‍यल स्टेट इन्वे्स्टर इसे जैवर में बनने को प्रस्तावि‍त ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्‍ट के लि‍ये ग्रहण मानते हैं और इन्वै‍स्टमेंट मार्केट के ट्रेंड से उन्हें लगता है कि‍ सरकार भले ही अपने पैसे से जैवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना ले कि‍न्तुं इन्वैस्टमेंट ‘रि‍टर्न’ रि‍स्क भरा होने से इसके लि‍ये तैयार नहीं होंगे। उल्ले्खनीय है कि‍ जैवर में बनने वाला एयरपोर्ट सि‍वि‍ल एवि‍ऐशन मि‍नि‍स्ट्री की ‘ ग्रीन फील्डन’ योजना के तहत बनना है,जो पूरी तरह प्राईवेट इन्वैलस्टरों के नि‍वेश पर आधारि‍त है।जैवर प्रोजैक्टज को घोषि‍त हुए लगभग दो महीने हो गये कि‍न्तु  एक भी ग्रीनफील्ड‍ प्रोजैक्टज का इन्वैस्‍टमैंट प्लेयर आगे आने की हि‍म्मत नहीं जुटा सका है। 
जैबर की हो चकबन्दी् :

 उधर जैवर में एयरपोर्ट बनने पर कामर्शि‍यल उपयोग के लि‍ये कि‍सानों की बडी बडी जमीने खरीदे हुए नि‍वेशक और राजनीति‍ज्ञ अलग परेशान हैं। सि‍वि‍ल सोसायटी की ओर से जैवर तहसील की चकबन्दी के बारे में पूछताछ शुरू की गयी है। सोसायटी के सैकेट्री अनि‍ल शर्मा का मानना है कि‍ जैबर एयरपोर्ट के लि‍ये जमीन अधि‍ग्रहि‍त करने से पहले तहसील में लंबि‍त चकबन्दी होनी चाहि‍ये जि‍ससे कि‍ गांव की जरूरी सुवि‍धाओं (स्कूल, चरागाह, चक रोडों, शमाशान घाट , पोखर-तालाब ,भूमि‍हीन अनुसूचि‍त  जनजाति‍ के लोगों के आवास ,डलाव घर ,खत्ता आदि‍) सहि‍त अन्य संभावि‍त सरकारी ग्राम्य‍ वि‍कास योजना )लि‍ये जमीन सुरक्षि‍त हो सकें। श्री शर्मा ने कहा कि‍ जैबर में राजस्‍व रि‍कार्ड दुरुस्‍ती का काम भी राजस्‍व वि‍भाग को करवाना चाहि‍ये जि‍ससे कि‍ जमीन की मि‍ल्‍कि‍यत और दर्ज उपयोग का मौजूदा स्‍थि‍ति‍ से मि‍लान हो सके।