August 20, 2017

जैबर एयरपोर्ट प्रोजैक्ट के लि‍ये इंग्लैंड में नि‍वेशकों की ढूंढ - ढकोर

--शेयर और बांड जारी कर करके भी स्वदेशी संसाधनों से जुटाया जा सकता है नि‍वेश 
जनता वि‍श्‍वास के आधार पर पहले बहुमत और  बडे
वि‍‍‍‍‍‍‍देशी  कर्ज की लि‍खी जाा रही है इबारत  
आगरा: सत्तर साल पूर्व देश बमुश्किल अंग्रेजों के शासन से आजाद हुआ था और व्यपारी बनकर शासन की बगडोर को हाथ मे लेने के खेल का बखूबी आम जनता ने वि‍श्लेषण कर ‘स्वदेशी’ का मर्म  समझा था कि‍न्तु‍ अब लगता है कि‍ उसे भुला दि‍या गया है। संसाधनों के अभाव के नाम पर केन्द्र  और राज्य  सरकारें कर्ज लेने के लि‍ये जमकर कोशि‍शें करने में जुटी हैं। इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे उन प्रोजैक्टों के लि‍ये भी वि‍देशी तकनीकि‍ और कर्ज लि‍ये जाने की कोशि‍श है जो कि‍ स्वदेशी नि‍वेशकों
के नि‍वेशों से सहजता के साथ जुटाये जा सकते हैं।
 उ प्र सरकार जैबर प्राजैक्टे के लि‍ये इंग्लैंड के लोगों से तो नि‍वेश करने पहुंच गयी और काऊंटर गारंटी तक की बात की जा रही है वहीं दूसरी ओर एयरपोर्ट प्राजेक्ट के लि‍ये स्पेशल परपज व्हैकि‍ल ( एस पी बी ) बनाये जाने का प्राजेक्ट तो पाइप लाइन में पहुंचाया जा चुका है। लेकि‍न  भारतीय नि‍वेशकों से बांड या शेयर जारी कर धन जुटाये जाने जैसा प्रयास अभी वि‍चार वि‍न्दुंओं तक में शामि‍ल नहीं है। सबसे दि‍लचस्प  तथ्य  है कि‍ इंग्लैंड के इकनामि‍क फील्ड एक्सापर्टों ने अबतक सि‍र्फ कंसल्टैंट बनने की ही पेशकश  की है, नि‍वेशक और एयरपोर्ट संचालक बनने की सीधी जि‍म्मेदारी लेने को कुछ भी कहने से बचने का ही प्रयास कि‍या है।
जेवर एयरपोर्ट के लिए नोडल एजेंसी का काम कर रही यमुना एक्सप्रेस वे इंडस्ट्रिी‍यल डेवल्पमेंट अथॉरिटी को शासन ने डीपीआर के साथ-साथ तकनीकी व आर्थिक फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कराने का निर्देश दिया है। ऐसे में अथॉरिटी ने कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए जारी हुए टैंडर के प्रत्युत्तर में अर्जि‍यां भी प्राप्त  हो चुकी हैं। कि‍न्‍तु भारतीय नि‍वेशकों को आगे लाने के लि‍ये कि‍सी भी योजना को लाने के बारे मेे नहीं सोचा गया है।
प्राप्‍त जानकारी के अनुसार उप्र सरकार के तहत कार्यरत यमुना एक्सप्रेस वे इंडस्ट्रियल डव्ल्‍पमेंट अथार्टी ब्रिटेन के इंटरनेशनल ट्रेड एंड इनवेस्टमेंट एडवाइजर के ग्रुप से संपर्क कर चुकी है और इसकी एक टीम ने जैबर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट साइट का नि‍रीक्षण कर लि‍या है और उम्मीद जताई है उनका एक प्रतिनिधिमंडल अगले महीने आएगा। 
जो भी हो नरेन्द्र मोदी सरकार के द्वारा जैबर मे ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाये जाने के फैसले के बाद कुछ नेताओं ने सुर्खि‍यां तो जरूर बटोरी कि‍न्तु  उ प्र सरकार के सामने भारी वि‍त्तीय चुनौति‍यां खडी कर दी। अगर नि‍वेशक नहीं मि‍ले तो 13000 करोड की लागत के  लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे प्रोजैक्टक की तर्ज पर आधारभूत खर्च के तोर पर बीस हजार रुपये सरकार को भी अपने पास से खर्च करने को इंतजाम करने पडेंगे। सरकार को बडे कर्ज और जरूरी योजनाओं के रास्‍ते पर ले जाने के चल रहे प्रयासों पर वि‍पक्ष भी उदासीन  और तठस्‍थ सा है। वि‍धान सभा में अपनी औपचारि‍क मौजूदगी रखने वाले सपा,बसपा, कांग्रेस में से एक भी पार्टी ने प्रदेश सरकार के वि‍त्‍तीय क्षेत्र मे बढती दि‍शाहीनता की स्‍थि‍ति‍ पर कुछ भी बोलना या कहना अब तक उपयुक्‍त नहीं समझाा है।