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July 16, 2017

आस्ट्रेलि‍यन क्रू ने लेह एयरबेस की वि‍षमता जानी

--सी -17ए ग्लोजबमास्टार को लेकर अनुभव का आदान प्रदान 
आस्‍ट्रेलि‍यन ने लेह पहुंच कर साझा की भारतीय चुनौति‍यों की हकीकत
आगरा:  रायल आस्ट्रेलि‍यन एयफोर्स ( आर ए ए एफ) और भारतीय वायू सेना के बीच तकनीकि‍ और पारस्पकरि‍क सुवि‍धाओं को लेकर आपसी  सहयोग बढेगा। गत महीने चार दि‍वसीय दौरे पर जोखि‍मों की चुनौति‍यों का सामना करने के  अनुभवों को साझा करने को दृष्टि ‍गत  एक सी-174गलोबमास्टकर और उसका क्रू भारत आया था। इस दौरे के बाद मि‍ले फीडबैक और मीडि‍या रि‍पोर्टों के अनुसार दोनों
देशों की वायु सेनाओं के बीच भवि‍ष्य में और अधि‍क सहयोग की संभावनाये बढी हैं।
.आस्ट्रेलि‍यन दल के नेतृत्व कर्त्ता ग्रुप कैप्टिव‍न एडम वि‍लि‍यम्सक ने कहा कि‍ उनके साथि‍यों को भारतीय वायू सेना के लेह स्थि‍‍त उस एयरुील्ड् को देखने का अवसर मि‍ला जो कि‍ समुद्र तल से 3200 मीटर ऊंचाई पर है और दुनि‍यां के दुर्गमतम स्थिति‍ वाले एयरुील्डों मे से एक माना जाता है। इतनी ऊंचाई पर वयुसेना के एयरक्राफ्टों को आप्रेट करना अपने आप में एक चुनौती भरा होता है खास कर जब कि‍ वायुदाव और आक्सींजन की बेहद कमी होती है।
क्रू मेम्बैरों ने जि‍न अनुभवों का आदान प्रदान कि‍या  उनमें एयर टू एयर रि‍फ्यूलि‍ग और लम्बीा दूरी की मि‍साइलें लाने लेजाने के लि‍ये सी -174 गलोबमस्टउर का उपयोग कि‍या जाना शामि‍ल था। उल्लेाखनीय है कि‍ आस्ट्रंलि‍या में वर्तमान में आठ सी174 ग्लो‍बमास्ट‍र है और ब्रि‍सबेन एयरबस से आप्रेट होते हैं , जबकि‍ भारत में इनकी संख्यार दस है और ये क्रमश: आगरा और हिडन एयरबेस से आप्रेट होते हैं। 
भारत और आसट्रेलि‍या दोनों ही ग्लो बमास्टभर एयरक्राफ्टो का इस्‍तेमाल मानवीय सहायता और मालढुलाई के लि‍ये ही मुख्यस रूप से करते हैं। फरवरी 2016 में भारतीय वायु सेना के ग्लो‍ब मास्टलर ने आर ए ए एफ के एम्ब रली एयर बेस पर लैंडि‍ग की थी उस समय आस्ट्रे1लि‍याई अधि‍कारि‍यों ने एयरक्राफ्ट को लेकर अपने अनुभव साझा कि‍ये थे। यह दौरा उस समय संभव हुआ था जबकि‍  फि‍जी एक आकस्मिन‍क सहायता देने के मि‍शन पर था।