December 11, 2016

सी बी आई' की कार्रवाहियों से कालाधन समेटकर रखना हुआ ना मुमकिन

--डायरैक्टर जनरल राकेश अस्थाना माने जाते हैं एजैंसी की इस बदली कार्यशैली के पीछे

राकेश अस्‍थाना:
'अब सीबीआई धारदार '
आगराः सी बी आई के ताबड तोड छापों से उन लोगों का मनोबल पूरी तरह से टूट गया है जो कि भारत सरकार के कालाधन नियंत्रण अभियान में सेंधमारी करके अपनी अवैध कमाई बचाये रखने को सक्रिय थे। गुरुवार को कोलकता के बडा बाजार के व्यवसायी व एक चार्टर्ड एकाउंटेंट सहित तीन लोगों को सात करोड़ के पुराने नोटो सहित पकड कर उन सभी को मुश्किएल में डाल दिया जो कि अपने आप को अबतक सुरक्षित माने बैठे थे .. इसी प्रकार का एक अन्य छापा एक्सिस बैंक की दिल्‍ली शाखा पर पडा, यहां भी शाखा के उपप्रबंधक बडे पैमाने पर मिली गडबडियों कों लेकर धर लिये गये.दिल्ली और एन सी आर के क्षेत्रों में तो सी बी आई की कार्रवाहियों को दौर नवम्बर के दूसरे सप्ताह से ही लगातार
जारी है।
सूरत के एक सीए और वहां के प्राइम कामर्शियल क्षेत्र उधना दरवाजा स्थित यार्न कंपनी के ऑफिस में ऐजैंसी की इकॉनोमिक ऑफेन्स विंग के छापे, भोपाल में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्लांट मैनेजर के यहां छापे, सहित दर्जनों परिणाम दायी कार्रवाहियों से सीबीआई अभूतपूर्व रूप से सुर्खियों में आ गयी, जब कि अब तक यह राज्यों और केन्द्र की अनुमतियों को लेकर चलते रहने वाले शीत टकराव से आर्थिक अपराधियों के लिये महत्वतहीन सी थी।
सी बी आई की सक्रियता के इस दौर की शुरूआत के पीछे नवनियुक्तम डायरैक्टीर राकेश अस्थाना की उस तेजतर्रार और संविधान को प्रतिबद्ध कार्यशैली को माना जा रहा है जिसमें फइलों को ज्योदा समय लाल तस्मों में जकडा रहने देना कभी शामिल नहीं रहा। एयरमार्शल (रि) शषेन्द्र पाल त्यागी की 3.600 करोड रूपए के अगस्ता वैस्ट लैंड हैलीकाप्टटर डील प्रकरण में  गिरफ्तारी भी इसी प्रकार की फाइल पर मजबूती से कसे हुए लाल फीता हटाये जाने से ही संभव हो सकी।

आगरा कनैक्शन

सैंटजॉस कॉलेज यादें:डा आर सी शर्मा एवं क्‍लासमेट्स के साथ राकेश।
                                           फोटो :पर्सनल आर्काइव अनिल शर्मा 
श्री अस्थाना हालांकि गुजरात कैडर 1984 बैच के आई पी एस अफसर हैं किन्तु  पैत्रिक पृष्ठभूमि आगरा की ही है, गोकुलपुरा मौहल्ले में इनके परिजन रहा करते थे .नौकरी की व्यस्तताओं के कारण उनका आगरा आना भले ही कम हो सका हो किन्तु न तो  आगरा वाले ही उन्हे भूले हैं और नहीं वह आगरा को। सेंटजोंस कॉलेज में 1978 -1982 में शिक्षा ग्रहण की, 1980  में बी ए तथा 1982  में प्रथम श्रेणी में इतिहास विषय से एम ए पास किया। उनकी इतिहास मे खास रुची रही तथा कॉलेज के कार्यक्रमों में बढचकर भाग लेते थे,टैनिस उनका प्रिय खेल था, जिसमें उन्होंं ने कई उपलब्धिरयां भी हांसिल कीं। जिन शिक्षकों से उन्हों ने शिक्षा ग्रहण की उनमें डा आर सी शर्मा,, डा.  रैनिक, और डा अमित मुखर्जी के नाम प्रमुख हैं। गोकुलपुरा मौहल्ले से उनका संबध था, जहां उनके चाचा रहा करते थे। खेल के साथ एजूकेशन कैरियर को भी स्तरीय बनाये रखने के लिये 'हेर्थान्थ.वेट' पुरुस्कार से सम्मानित किये गये।
हाल में ही बडोदरा में हुए अपने एक पारवारिक समारोह में सैंटजांस  कॉलेज में साथ पढे तमाम पुराने साथियों को भी आमंत्रित किया था। वी आई पी मैहमानों के जमघट के बावजूद आगरा से गये इन स्वजनों के साथ जो आत्मीयता उससे वे सभी अभिभूत थे।
पुराने साथियों में ही एक श्री अनिल शर्मा से जब उन्हों ने उनके ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट आगरा डिजर्ब्सय इट सोशलमीडिया कौंपेन 'की अब तक रही प्रगति के बार में पूछा तो श्रीशर्मा आश्चर्य चकित रह गये, उन्हें नहीं मालूम था कि देश का इतना बडा पुलिस अफसर तमाम व्यस्तताओं के बावजूद अपने मित्रों की गतविधियों पर भी इतनी अत्मीय नजर रखता है। इसी प्रकार का वार्तालाप एक अन्य पुराने मित्र, टूरिज्मी गिल्डु, आगरा के जनरल सैकैट्री राजीव सक्सेना से भी हुआ। श्री सक्सेना का मानना ​​है कि आगरा के टूरिजम के बारे में उनसे भी कही अधिक जानकारियां उनके उस पुराने दोस्त को थीं जो कि वर्तमान में देश के एक महत्वैपूर्ण पद पर केवल औपचारिक रूप से पदस्थ ही नहीं असरदार भूमिका निर्वाहन कर रहा है।